राजनीति

गुप्तेश्वर पांडेय को 11 साल पहले बीजेपी ने किया था निराश, क्या अब नीतीश पूरी करेंगे आस?

ऐसा नहीं है कि बिहार कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय के चुनाव लड़ने की चाह नई है। वह पहले भी चुनाव लड़ना चाहते थे और आईजी के पद से इस्तीफा तक दे दिया था, लेकिन जिस पार्टी से उम्मीद थी उसने उन्हें घास ही नहीं डाली। अब उनके बिहार के डीजीपी पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने के बाद यह कयास फिर से लगाए जा रहे हैं कि पुलिस करियर के खात्मे के साथ उनका राजनीतिक करियर शुरू होने वाला है। कहा ज रहा है कि वह अपने गृह जिला बक्सर से नीतीश कुमार की पार्टी जेडी (यू) से चुनावी मैदान (Bihar Elections 2020) में ताल ठोंक सकते हैं।

इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले भी गुप्तेश्वर पांडेय ने इस्तीफा दिया था। तब उनकी भाजपा से नजदीकी की चर्चा थी और माना जा रहा था कि उन्हें बक्सर से टिकट मिलना तय है। राजनीतिक चर्चा गरम थी कि तत्कालीन सांसद लालमुनि चौबे का टिकट भाजपा काटने जा रही है और गुप्तेश्वर पांडेय उम्मीदवार होंगे। हुआ इसके उलट और बागी तेवर दिखाने के बाद एक बार फिर लालमुनि चौबे को भाजपा का टिकट मिल गया। इस तरह राजनीतिक पारी आगाज होने से पहले ही गुप्तेश्वर पांडेय के सपनों पर पानी फिर गया।

टिकट न मिलने से निराश गुप्तेश्वर पांडेय ने इस्तीफा वापस लेने की अर्जी दी और नीतीश कुमार सरकार ने इसे मंजूर भी कर लिया। इस तरह से नौ महीनों के बाद वह फिर से पुलिस सेवा में बहाल हो गए थे। हालांकि, कई लोग मानते हैं कि पुलिस सेवा में उनकी वापसी राजनीतिक कनेक्शन की वजह से हो पाई थी।


1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय बक्सर जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इटाढ़ी प्रखंड का गेरुआबांध में पैदा हुए। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई बक्सर से की है और उसके बाद उन्होंने पटना कॉलेज से संस्कृत में ग्रैजुएशन किया। पहले प्रयास में उन्हें सिविल सर्विस परीक्षा में सफलता नहीं मिली, जबकि दूसरे प्रयास में उनका चयन 1986 में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के लिए हुआ और तीसरे प्रयास में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में सफलता मिली थी।

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