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संकट: सितंबर में 41% किस्त हुईं बाउंस, वसूली के लिए कमर कस रहे बैंक-एनबीएफसी

करोना संकट ने हर आम और खास के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उपभोक्ता कमाई घटने या नौकरी जाने से ईएमआई में चूक करने लगे हैं। इससे बैंकों और एनबीएफसी को कर्ज फंसने का डर सताने लगा है। नेशनल ऑटोमेटेड क्लीयरिंग हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक 31 अगस्त को मोरेटोरियम खत्म होने के बाद सितंबर में ईएमआई की डिफॉल्ट दर 41 फीसदी पर पहुंच गई जो फरवरी में 31 फीसदी थी। इसके बावजूद पहले सस्ता कर्ज देकर ग्राहकों को लुभाने और बाद में हर तरीके अपनाकर कर्ज वसूली की तैयारी करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। त्योहारी मौसम में ई-कॉमर्स कंपनियां भी बैंकों और एनबीएफसी के लिए ग्राहकों तक पहुंचने का एक बेहतर जरिया बन गई हैं। ऐसे में यदि त्योहारों के मौके पर ईएमआई के जरिये खरीदारी की योजना बना रहे हैं तो हर तरह की पड़ताल कर लें वरना आप मुसीबत में फंस सकते हैं।

वसूली के लिए कमर कस रहे बैंक-एनबीएफसी

मौजूदा समय कर्ज के एऩपीए होने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। आरबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा एनपीए घोषित करने पर रोक हटाए। दरअसल मोरेटोरियम खत्म होने के बाद डिफॉल्ड बढ़ा है। लेकिन बैंकों और एनबीएफसी को अभी कर्ज वसूली में परेशानी हो रही है। बैंकों और एनबीएफसी ने नए वसूली एजेंटो की भर्ती शुरू कर दी है। डिफॉल्ट बढ़ने से बैंकों और एनबीएफसी को डर है कि उनका कर्ज फंस सकता है।

कहीं महंगी न पड़ जाए खरीदारी

कर्ज की श्रेणी के आधार पर उसका जोखिम तय होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन असुरक्षित श्रेणी के कर्ज में आते हैं जिससे इन पर ब्याज ऊंचा होता है। साथ ही इनके बिल भुगतान या ईएमआई में चूक पर क्रेडिट स्कोर में तेज गिरावट आती है। वहीं होम लोन और कार लोन सुरक्षित श्रेणी में आते हैं। हालांकि, इनकी ईएमआई में चूक होने पर असुरक्षित कर्ज के मुकाबले क्रेडिट स्कोर कम घटता है। इसके बावजूद ज्यादा डिफॉल्ट होने पर घर और कार पर बैंक कब्जा कर सकते हैं। ऐसे में अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन करने के बाद ही कोई भी फैसला करें।

…..पर आपके लिए कर्ज का सुनहरा जाल हो रहा तैयार

आसान शर्तों पर लोन बांटने की तैयारीः क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से रिपोर्ट मांग कर बैंक त्योहार पर जमकर क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, होम लोन बांटने की योजना बना रहे हैं। इसमें कई तरह की आकर्षक पेशकश की जा रही है। बैंकों और क्रेडिट कार्ड कंपनियों ने मोरेटोरियम अवधि में कर्ज बांटने की शर्तें सख्त कर दीं थीं। लेकिन अब हर तरह का कर्ज बेहद आसान शर्तों पर मिल रहा है। कंपनियों का कहना है कि अगले एक से दो माह के त्योहारी मौसम में कर्ज की मांग बहुत तेज रहने वाली है। एचडीएफसी ने कहा है कि सितंबर तिमाही में उसका कर्ज कोरोना पूर्व के 95 फीसदी के स्तर पर पहुच गया। क्रेडिट कार्ड कंपनियों को भी मांग बढ़ती दिख रही है।

ई-कॉमर्स के जरिये जेब पर सेंधः कोरोना संकट में उपभोक्ताओं द्वारा खर्च कटौती बैंकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में ई-कॉमर्स कंपनियां उनके लिए उम्मीद की किरण बन गई हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों ने प्रोडक्ट फाइनेंसिंग के लिए 70 बैंकों और एनबीएफसी से गठजोड़ किया है। इसके लिए तरह-तरह की पेशकश की जा रही है।

एक साल बाद भुगतान की पेशकशः ई-कॉमर्स, बैंक और एनबीएफसी इस साल त्योहारो पर एक नई पेशकश लेकर आए हैं। इसमें खरीदारी पर 70 फीसदी भुगतान ईएमआई के जरिेय करने और 30 फीसदी भुगतान अगले साल करने का विकल्प दिया जा रहा है। इसमें अगले साल पुराना उत्पाद बदलने (एक्सचेंज) पर 30 फीसदी भुगतान करने या पहले को उत्पाद को अपने पास रखने पर भुगतान का विकल्प है। इतना ही नहीं ईएमआई की अवधि की न्यूनतम छह माह से बढ़ाकर नौ माह कर दी गई है।

छोटे शहरों के ग्राहकों पर नजरः

ई-कॉमर्स कंपनियां अपनी कुल बिक्री का 75 फीसदी त्योहारों पर करती हैं जिसमें ज्यादातर ईएमआई के जरिये खरीदे जाते हैं। इसमें करीब 75 फीसदी खरीदार दूसरी श्रेणी के शहर (छोटे शहरों) के होते हैं। बैंकों और एनबीएफसी के जरिये ई-कॉमर्स सस्ती ईएमआई के जरिये इन ग्राहकों तक पहुंचने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। फ्लिपकार्ट ने इस साल सात करोड़ खरीदारों तक पहुंचने की योजना बनाई है। वहीं अमेजन की पांच करोड़ खरीदारों तक पहुंचने की योजना है।

चुनौतियां

31 फीसदी था फरवरी में डिफॉल्ट रेट

30 जून तक 8.36 अरब रुपये था बैंकों के फंसे कर्ज का आंकड़ा

06 माह का मोरेटोरियम दिया था आरबाआई ने 31 अगस्त तक

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