बिहार

खैनी, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी से कर लें तौबा… तंबाकू सेवन से प्रतिवर्ष बिहार में 60 हजार नए कैंसर पीड़ित

तंबाकू बिहार में कैंसर का एक बड़ा कारण है। राज्य में प्रतिवर्ष 80 हजार लोग कैंसर से पीड़ित होकर अस्पताल में पहुंच रहे हैं। इनमें से लगभग 75 से 80 प्रतिशत मरीज मुंह, गले, स्वर ग्रंथी और खाने की नली के कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है मरीजों द्वारा लंबे समय तक गुटखा, खैनी आदि जैसे तंबाकू पदार्थ का सेवन किया जाना। 

पूरे देश में 12 लाख नए लोग कैंसर से ग्रसित होते हैं। इनमें से लगभग तीन लाख लोग तंबाकू सेवन के कारण कैंसर पीड़ित होते हैं। उनमें से लगभग आधे लोग मौत के शिकार होते हैं। राज्य के वरीय कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सिंह और पारस हॉस्पिटल के डॉ. शेखर केसरी ने बताया कि अगर लोग तंबाकू का सेवन बंद कर दें तो राज्य में कैंसर पीड़ितों की संख्या एक चौथाई से भी कम रह जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर वर्ष 31 मई को तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। लेकिन कैंसर से बचाव के लिए हमें हर दिन तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाना चाहिए।

कैंसर को जन्म देने वाले 70 तत्व तंबाकू में मौजूद 
तंबाकू में कैंसर को जन्म देने वाले 70 रसायनिक तत्व मौजूद रहते हैं। इसमें निकोटिन सबसे हानिकारक तत्व होता है। इसके कारण लोग तंबाकू के आदि हो जाते हैं। तम्बाकू-सेवन से शरीर के किसी भी हिस्से में कैंसर हो सकता है। मुख्य रूप से मुंह और गले का कैंसर, स्वर-ग्रंथि का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, खाने की नली व आमाशय, मूत्राशय और यहां तक की बच्चेदानी के मुख में होने वाले कैंसर भी शामिल हैं। युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में मुंह और गले के कैंसर से ग्रसित होकर एडवांस स्टेज में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिसका इलाज कठिन हो रहा है।  

पद्मश्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष का थीम है कमिट टू क्विट। इसके माध्यम से लोगों को तंबाकू का सेवन छोड़ने के लिए प्रेरित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत में अब स्कूली बच्चों और किशोर बड़ी संख्या में तंबाकू सेवन और उसके बाद कैंसर जैसी बीमारी के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने गुटखा-खैनी आदि के उत्पादन पर ही रोक लगाने की मांग की।

Share This Post