बिहार

बिहार में जैविक के बाद पर अब हर्बल कॉरिडोर बनेगा, तैयारी शुरू

जैविक कॉरिडोर के बाद अब राज्य में हर्बल कॉरिडोर बनेगा। सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। कोरोना काल में औषधीय गुणों वाले पौधों की मांग बढ़ी तो सरकार ने इसकी खेती को बढ़ावा देने का फैसला किया है। साथ ही इस योजना को बाजार से भी जोड़ेगी।

कृषि विभाग ने हर्बल कॉरिडोर के लिए उन्हीं जिलों का चयन करने का फैसला किया है, जहां पहले से औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती होती है। लिहाजा उम्मीद है कि गंगा किनारे के जिले ही इस योजना से भी जुड़ेंगे। पहले विभाग ने गंगा किनारे के 13 जिलों को जोड़कर जैविक खेती के लिए एक कॉरिडोर की स्थापना भी की है। 

कृषि सचिव डा. एन सरवण कुमार ने आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत इसका चयन करने के बाद इसपर काम शुरू करने की जिम्मेवारी उद्यान निदेशालय को दी है। निदेशालय जल्द ही पूरी योजना तैयार कर लेगा। उसके बाद पूरा प्रारूप सामने आयेगा। इस योजना के लिए किसानों को भी उसी तरह से मदद की जाएगी, जैसे जैविक कॉरिडोर से जुड़े किसानों को दी जाती है। 
  
 पटना के अलावा बेगूसराय और वैशाली जिले में लेमनग्रास, मेंथा और कई दूसरे औषधीय और सुगंधित पौघों की खेती होने लगी है। अब तो भोजपुर और रोहतास की सीमा पर बसे गांवों में भी पीपरमिंट की खेती ने काफी जोर पकड़ी है। गंगा किनारे के गांव तो नीलगायों से बचने के लिए इसकी खेती करते हैं। इन फसलों को नीलगाय नहीं खाते हैं। लेकिन, दूसरे जिले के किसान आमदनी से प्रभावित होकर इसकी खेती से जुड़े हैं। 

पटना जिले में ऊंचे खेतों में किसान लेमनग्रास और मेंथा की खेती करते थे। लेकिन, संगठन के अभाव में इसके खरीदार नहीं मिले। लिहाजा अब किसान फिर पारंपरिक खेती की ओर मुड़ने लगे हैं। सरकार प्रोत्साहित करेगी तो किसानों का रुझान और आमदनी बढ़ेगी। – सुधांशु कुमार, प्रगतिशील किसान, बिहटा 

कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित जिले – 
पटना, नालंदा, वैशाली, भोजपुर, बक्सर, सारण, बेगूसराय, समस्तीपुर, मुंगेर, लखीसराय, भागलपुर, खगड़िया और कटिहार। 

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