बिहार विधानसभा चुनाव 2020

बिहार विधानसभा चुनाव 2005: जब लालू राज के खात्मे के बाद, नीतीश के हाथों में आई सत्ता की बागडोर

बिहार की राजनीति में 2005 का चुनाव दूरगामी परिणामदायी रहा। राज्य के विभाजन के बाद हुए एक ही वर्ष में दो चुनाव पहली बार बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का वाहक बना। राज्य में 15 साल के राजद शासन के बाद बिहार की राजनीति ने करवट ली। पहली बार विभाजित बिहार में सुशासन एवं विकास राजनीति का मुख्य मुद्दा बना। अंतत: लालू प्रसाद के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शासन की समाप्ति हुई और  सत्ता की बगडोर नीतीश कुमार को संभालने का मौका मिला।

वर्ष 2005 फरवरी  के चुनाव में किसी को नहीं मिला बहुमत
राज्य के बिहार में 243 विधानसभा सीट के लिए फरवरी 2005 में हुए चुनाव में किसी दल को सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत नहीं मिली। गठबंधन की सरकार बनाने को बेताब राजद को इस बार सत्ता की चाभी नहीं मिली। सत्ता की चाभी अपने पास होने का दावा करते लोक जनशक्ति पार्टी भी अंततः कोई विकल्प नहीं सामने ला सकी। ऐसे में फिर चुनाव में जाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं था। 

आठ माह बाद हुए चुनाव में जदयू-भाजपा गठबंधन को बहुमत 
फिर, अक्टूबर 2005 में हुए चुनाव में जदयू व भाजपा गठबंधन को बहुमत हासिल हुई। फरवरी में जहां राजद के सत्ता में पुन: वापसी के कयास लगाए जा रहे थे। वहीं आठ महीने के अंतराल पर हुए दोबारा चुनाव में बिहार की राजनीतिक परिस्थिति पूरी तरह बदल गयी। इस चुनाव में जनता ने राजनीतिक बदलाव को लेकर स्प्ष्ट संकेत दिए। सत्ता का जो समीकरण फरवरी में उलझा हुआ था वह अक्टूबर में पूरी तरह स्पष्ट हो गया। फरवरी में हुए चुनाव में राजद को जहां 75 सीटें मिली थीं, वहीं अक्टूबर में यह घटकर 54 हो गईं। जदयू को 55 की जगह 88 व भाजपा को 37 के स्थान पर 55 सीटें मिलीं। इसी प्रकार कांग्रेस को 10 के स्थान पर नौ तो लोक जनशक्ति पार्टी को 29 की जगह मात्र 10 सीटें प्राप्त हुई। 

फरवरी के बाद अक्टूबर में कम हो गए प्रत्याशी, किंतु अधिक जीती महिलाएं
2005 के फरवरी की तुलना में अक्टूबर में हुए चुनाव में प्रत्याशी कम हो गए। फरवरी में 3193 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे जबकि अक्टूबर में 2135 ही चुनाव लड़े, जबकि फरवरी में जहां मात्र 3 महिलाएं चुनाव जीती थीं। अक्टूबर में चुनाव जीतने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर 25 हो गयी। फरवरी में मतदान प्रतिशत 46.50 था जबकि अक्टूबर में यह 45.85 रहा। 

वर्ष 2005 फरवरी का चुनाव 
प्रति बूथ औसत मतदाता – 1053
कुल मतदाता – 5, 26, 87,663
मतदान किये – 2,44,97,375
प्रति सीट औसत उम्मीदवार – 13

वर्ष 2005 अक्टूबर चुनाव 
प्रति बूथ औसत मतदाता – 910
कुल मतदाता – 5,13,85,891
मतदान किये – 2, 35, 58,640
प्रति सीट औसत  उम्मीदवार – 9 

वर्ष 2005 अक्टूबर में किसने कितनी सीटें जीती
जदयू – 88
भाजपा – 55
बसपा – 04
सीपीआई – 03
सीपीएम – 01
कांग्रेस – 09
एनसीपी – 01
भाकपा माले – 05
लोजपा – 10
राजद – 54
अखिल जन विकास दल – 01
 निर्दलीय – 10 

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Kunal Raj
Editor-In-Chief l Software Engineer l Digital Marketer