बिहार

बिहार में 4 से स्कूल खुलने के बाद स्कूल प्रबंधन समेत शिक्षक और स्टूडेंट्स के लिए होंगी ये चुनौती

बिहार के माध्यमिक-उच्च माध्यमिक हाईस्कूल, कोचिंग समेत अन्य शैक्षणिक संस्थान 4 जनवरी से खुल जायेंगे। बिहार के सभी शिक्षण संस्थान 14 मार्च से ही बंद हैं। अर्थात इन्हें करीब साढ़े नौ माह बाद खोला जाएगा, तो इन्हें कई चुनौतियों से भी गुजरना पड़ेगा।

चुनौतियां स्कूल प्रबंधन, शिक्षक और विद्यार्थी तीनों ही के लिए होंगी। सबसे बड़ी चुनौती कोरोना साये के बीच बच्चों को पहले की तरह सुरक्षित माहौल देना होगा, सामाजिक दूरी का पालन कराना होगा। इससे भी बड़ी चुनौती महज एक-डेढ़ माह में ही साढ़े नौ महीने की पढ़ाई की क्षति की भरपाई करनी होगी। खासतौर से स्कूलों की बात करें तो उनके पास सिर्फ फरवरी तक का ही समय होगा, क्योंकि उसके बाद वार्षिक परीक्षाएं आरंभ हो जाएंगी। गौरतलब हो कि जब 4 जनवरी को स्कूल खुलेंगे तो स्कूल प्रबंधन के पास जनवरी में महज 19 और फरवरी में 20-21 यानी कुल 40 कार्यदिवस में सालभर के बचे हुए सिलेबस को पूरा करने का टास्क होगा।

यह बात दीगर है कि स्कूलों ने बंदी के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर भरपाई की कोशिश की है। लेकिन डाउट क्लियरेंस या फिर क्लासरूम टीचिंग के लिए 40 दिनों की वास्तविक कक्षाएं बच्चों के आगामी कॅरियर के लिए बहुत मायने रखने वाली हैं।

अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा का दिलाना होगा भरोसा
सबसे बड़ी बात अभिभावकों को भरोसा दिलाना होगी कि स्कूल में उनके बच्चे सुरक्षित पढ़ रहे हैं। साथ ही बच्चों के लिहाज से देखें तो करीब साढ़े नौ महीने बाद जब वह ‘घर की कैद’ से निकल कर स्कूल जायेंगे, तब उन्हें उछल-कूद, घुलने-मिलने, गुत्थम-गुत्थी से हटकर एक दूसरे से दूरी बरकरार रखने के लिए मनाना मुश्किल भरा होगा।

स्कूल खुलते ही परीक्षाओं का दौर होगा शुरू
एक तरफ जहां पंद्रह दिन बाद प्रारंभिक कक्षाओं को खोलने की घोषणा हुई है वहीं दूसरी तरफ पहले से ही जनवरी से परीक्षाएं घोषित हैं। ऐसे में नियमित होकर और गुणवत्ता के साथ कक्षा संचालन टफ टास्क होने वाला है। गौरतलब हो कि इंटर का प्रैक्टिकल 9 से 18 जनवरी एवं मैट्रिक का 20 से 22 जनवरी तक होना है। उसके बाद प्रैक्टिकल की कॉपियों की जांच तथा रिजल्ट तैयार करने में शिक्षक लग जायेंगे। फिर तुरंत फरवरी में इंटर व मैट्रिक की परीक्षाएं होनी हैं। 1 से 23 फरवरी तक ये परीक्षाएं चलेंगी और वीक्षण तथा मूल्यांकन आदि कार्यों में शिक्षकों के व्यस्त होने का असर पठन-पाठन पर पड़ेगा।

स्कूल प्रबंधन की चुनौतियां
बच्चों, शिक्षकों एवं कर्मियों के लिए सेनेटाइजर, साबुन- पानी एवं थर्मल स्कैनर की व्यवस्था तथा इनका उपयोग करवाना
विद्यालय कक्ष सहित पूरे परिसर की साफ-सफाई, प्रतिदिन सेनेटाइजेशन की व्यवस्था
वर्ग कक्ष में, लंच ब्रेक, छुट्टी, दोपीरियड के बीच गैप आदि में सोशल डिस्टेंसिंग कायम रखवाना
अभिभावकों को उनके बच्चों को स्कूल भेजने तथा सुरक्षा का ख्याल रखने का विश्वास दिलाना
बच्चों को कोरोना काल के पूर्व की तरह नियमित स्कूल आने के लिए प्रेरित करना


शिक्षकों की चुनौतियां
एक ही सेक्शन के बच्चों के 2 दिन आने से एक ही टॉपिक को दोबारा पढ़ाकर सिलेबस को कम समय में पूरा कराना
कोरोना काल में जिन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई की और जिन्होंने नहीं की, इन बच्चों को साथ लेकर आगे चलना
गरीब घर के वैसे बच्चे जिन्होंने एकदम पढ़ाई नहीं की, उन्हें वार्षिक परीक्षा के लिए तैयार कराना
बोर्ड, इंटर की परीक्षाओं की जिम्मेवारी के साथ स्कूल की कक्षाओं का संचालन

छात्रों की चुनौतियां
स्कूल अवधि में पूरे समय मास्क लगाए रखना, बार-बार हाथ धोना आदि
विद्यालय में खेल सहित अन्य गतिविधियों के न होने पर भी अपना उत्साह बनाए रखना
आपसी दूरी /सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखकर अपने वर्ग कक्ष में ही बैठे रहना
सार्वजनिक वाहनों से विद्यालय आने के दौरान सावधानी बरतना

यह बात दीगर है कि स्कूलों ने बंदी के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर भरपाई की कोशिश की है। लेकिन डाउट क्लियरेंस या फिर क्लासरूम टीचिंग के लिए 40 दिनों की वास्तविक कक्षाएं बच्चों के आगामी कॅरियर के लिए बहुत मायने रखने वाली हैं।

अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा का दिलाना होगा भरोसा
सबसे बड़ी बात अभिभावकों को भरोसा दिलाना होगी कि स्कूल में उनके बच्चे सुरक्षित पढ़ रहे हैं। साथ ही बच्चों के लिहाज से देखें तो करीब साढ़े नौ महीने बाद जब वह ‘घर की कैद’ से निकल कर स्कूल जायेंगे, तब उन्हें उछल-कूद, घुलने-मिलने, गुत्थम-गुत्थी से हटकर एक दूसरे से दूरी बरकरार रखने के लिए मनाना मुश्किल भरा होगा।

स्कूल खुलते ही परीक्षाओं का दौर होगा शुरू
एक तरफ जहां पंद्रह दिन बाद प्रारंभिक कक्षाओं को खोलने की घोषणा हुई है वहीं दूसरी तरफ पहले से ही जनवरी से परीक्षाएं घोषित हैं। ऐसे में नियमित होकर और गुणवत्ता के साथ कक्षा संचालन टफ टास्क होने वाला है। गौरतलब हो कि इंटर का प्रैक्टिकल 9 से 18 जनवरी एवं मैट्रिक का 20 से 22 जनवरी तक होना है। उसके बाद प्रैक्टिकल की कॉपियों की जांच तथा रिजल्ट तैयार करने में शिक्षक लग जायेंगे। फिर तुरंत फरवरी में इंटर व मैट्रिक की परीक्षाएं होनी हैं। 1 से 23 फरवरी तक ये परीक्षाएं चलेंगी और वीक्षण तथा मूल्यांकन आदि कार्यों में शिक्षकों के व्यस्त होने का असर पठन-पाठन पर पड़ेगा।

स्कूल प्रबंधन की चुनौतियां
बच्चों, शिक्षकों एवं कर्मियों के लिए सेनेटाइजर, साबुन- पानी एवं थर्मल स्कैनर की व्यवस्था तथा इनका उपयोग करवाना
विद्यालय कक्ष सहित पूरे परिसर की साफ-सफाई, प्रतिदिन सेनेटाइजेशन की व्यवस्था
वर्ग कक्ष में, लंच ब्रेक, छुट्टी, दोपीरियड के बीच गैप आदि में सोशल डिस्टेंसिंग कायम रखवाना
अभिभावकों को उनके बच्चों को स्कूल भेजने तथा सुरक्षा का ख्याल रखने का विश्वास दिलाना
बच्चों को कोरोना काल के पूर्व की तरह नियमित स्कूल आने के लिए प्रेरित करना


शिक्षकों की चुनौतियां
एक ही सेक्शन के बच्चों के 2 दिन आने से एक ही टॉपिक को दोबारा पढ़ाकर सिलेबस को कम समय में पूरा कराना
कोरोना काल में जिन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई की और जिन्होंने नहीं की, इन बच्चों को साथ लेकर आगे चलना
गरीब घर के वैसे बच्चे जिन्होंने एकदम पढ़ाई नहीं की, उन्हें वार्षिक परीक्षा के लिए तैयार कराना
बोर्ड, इंटर की परीक्षाओं की जिम्मेवारी के साथ स्कूल की कक्षाओं का संचालन

छात्रों की चुनौतियां
स्कूल अवधि में पूरे समय मास्क लगाए रखना, बार-बार हाथ धोना आदि
विद्यालय में खेल सहित अन्य गतिविधियों के न होने पर भी अपना उत्साह बनाए रखना
आपसी दूरी /सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखकर अपने वर्ग कक्ष में ही बैठे रहना
सार्वजनिक वाहनों से विद्यालय आने के दौरान सावधानी बरतना

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