बिहार

बिहार में फिर उफनाईं बागमती और बूढ़ी गंडक, इन इलाकों में बढ़ा बाढ़ का खतरा

नेपाल में हुई भारी वर्षा के दो दिनों बाद बिहार में बागमती और बूढ़ी गंडक में एक बार फिर ऊफान आ गया। हालांकि, जहां डिस्चार्ज बढ़ने की आशंका थी, उस नदी गंडक का न सिर्फ डिस्चार्ज घटा है बल्कि जलस्तर भी नीचे आया है। इसके अलावा कमला नदी का जलस्तर भी रविवार को तेजी से बढ़ा है। गंगा भी सभी जगह उतरी है लेकिन कहलगांव में जलस्तर थोड़ा बढ़ा है।

गंडक का डिस्चार्ज रविवार को वाल्मीकिनगर बराज पर एक लाख 63 हजार घनसेक है। यह नदी गोपालगंज में उतरकर लाल निशान से 97 सेमी ऊपर रह गई है। मुजफ्फरपुर में तो मात्र दो सेमी ऊपर रह गई है। कोसी से भी बराह क्षेत्र में एक लाख 18 हजार और बराज पर एक लाख 50 हजार घनसेक पानी आ रहा है। कोसी थोड़ा उतरी है और खगड़िया में लाल निशान से 177 सेमी ऊपर बह रही है। शनिवार की तरह कटिहार में यह नदी लाल निशान से 91 सेमी ही ऊपर है।

बागमती नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में सीतामढ़ी में एक मीटर से ज्यादा ऊपर चढ़ा है। वहां लाल निशान से नीचे चली गई बागमती रविवार को फिर 25 सेमी ऊपर चली गई। शिवहर में भी इसका जलस्तर लगभग 60 सेमी चढ़ा है। वहां लाल निशान से 33 सेमी ऊपर है। लेकिन दरभंगा में इसका घटना जारी है और वहां 127 सेमी ऊपर है।

बूढ़ी गंडक का जलस्तर रविवार को और बढ़ गया। मुजफरपुर में भी यह लाल निशान से 24 सेमी ऊपर चली गई। समस्तीपुर में 136 और रोसड़ा में 191 सेमी लाल निशान से ऊपर है। अधवारा सीतामढ़ी में 70 सेमी, कमला झंझारपुर और जयनगर दोनों जगहों पर लाल निशान से 50 सेमी ऊपर है। खिरोई भी दरभंगा में 105 सेमी ऊपर है। महानंदा पूर्णिया में 13 और घाघरा सीवान में 47 सेमी ऊपर है। गंगा का जलस्तर पटना के गांधी घाट में अब लाल निशान से नीचे चला गया है। हाथीदह में जलस्तर गिरकर लाल निशान से 48 सेमी ऊपर रह गया है। कहलगांव में दो सेमी बढ़कर 82 सेमी ऊपर है।

उत्तर बिहार के जिलों से गुजरने वालीं लगभग सभी बड़ी नदियों में उफान थम गया है। हालांकि खेतों में अभी पानी जमा हुआ है। जलनिकासी नहीं होने के कारण पानी जमा हुआ है। दूसरी ओर पूर्वी व पश्चिम चंपारण के दर्जनों गांवों में अभी बाढ़ का संकट टला नहीं है। पानी कमने के बावजूद लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है। बगहा, बेतिया, मोतिहारी और सीतामढ़ी के सौ से अधिक गांवों में अब भी पानी जमा है।

दूसरी ओर समस्तीपुर के मोरवा में नून नदी का पानी रविवार को फोरलेन के बेस कैंप को भी अपनी चपेट में ले लिया। करीब 10 फुट पानी से पूरा बेस कैंप घिर गया है। इससे सभी कर्मी कैंप छोड़ कर जा चुके हैं। पूर्वी चंपारण में बाढ़ से राहत के बावजूद तेतरिया व केसरिया में कटाव हो रहा है। सुगौली, बंजरिया, अरेराज, पताही, संग्रामपुर आदि प्रखंडों में तेजी से पानी कम हो रहा है। लाल बकेया गुवाबारी में बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर स्थिर है। गंडक बराज वाल्मीकिनगर ने 1,76,200 क्यूसेक पानी रविवार को छोड़ा है।

किसानों को धान की बीमारी का खतरा

बाढ़ से नुकसान झेल चुके किसानों को अब धान में बीमारी का भी खतरा है। बारिश के बाद धान के फसल में कई तरह के रोगों का खतरा हो गया है। इसमें झुलसा रोग, चित्ति रोग, लीफ फोल्डर जैसी बीमारी हो सकती है। इससे धान की उपज प्रभावित हो सकती है। जिन इलाकों में बाढ़ नहीं है वहां भी बारिश के कारण धान के फसल को नुकसान हो सकता है। पौधा संरक्षण विभाग ने इसके लिए एडवाइजरी जारी की है।

धान की फसल में लगने वाले रोगों की पहचान और रोकथाम के बारे में पौधा संरक्षण विभाग के सहायक निदेशक अरविंद कुमार ने एडवाइजरी जारी किया है। कहा गया है कि जिले में अभी धान के पौधे की रोपनी किए हुए एक माह से अधिक हो चुके हैं। बारिश अधिक होने से बाढ़ जैसी स्थिति है। अभी बारिश हो रही है। वर्षा के बाद वातावरण में बढ़े हुए तापमान और आर्द्रता की स्थिति में धान में फंफूदजनित व जीवाणुजनित रोगों के संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। सहायक निदेशक ने एडवाइजरी में बताया है कि अभी धान में पांच तरह की बीमारियों- झुलसा रोग, जीवाणु जनित झुलसा रोग, भूरी चित्ति रोग, खैरा रोग और शीथ ब्लाइट- का खतरा है।

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