बेगूसराय

बेगूसराय में फिर लगी महिला के शव की बोली, इलाज में लापरवाही से हुई थी मौत

बेगूसराय। बखरी में एक बार फिर महिला के शव की बोली लगाई गई। इलाज में लापरवाही से हुई मौत के बाद स्वजनों के हाथों में चंद सिक्के थमा कर मामले को रफा-दफा कर दिया गया। मामले का सबसे दुखद पहलू यह कि यह पूरा खेल पुलिस की मौजूदगी और उसके संज्ञान में हुआ। मामला रविवार की अलसुबह का बताया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत निवासी महिला को प्रसव पीड़ा के बाद 15 अगस्त की रात बखरी पीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां उसने एक बेटे को जन्म दिया। डिलीवरी नॉर्मल थी, लेकिन प्रसव के बाद ब्लीडिग बंद नहीं हो रही थी। फलत: डॉक्टरों ने महिला को बेगूसराय रेफर कर दिया। परंतु, विचौलियों (आशा) के चक्कर में मरीज को उक्त निजी क्लीनिक में भर्ती करा दिया गया। सूत्र बताते हैं कि क्लीनिक के डॉक्टर ने महिला के युट्रस की नस फट जाने की बात कहते हुए आपरेशन कराने की सलाह स्वजनों को दी। महिला को ठीक कर देने के आश्वासन के बाद स्वजनों ने उसी आपरेशन के साथ महिला का बंध्याकरण भी कर देने की बात डॉक्टर से कही। इसके बाद महिला का आपरेशन किया गया। शल्य चिकित्सा के बाद मरीज की हालत और गंभीर हो गई। महिला का पेशाब बंद हो गया। जिससे उसका पेरू और पेट काफी फूल गया। मध्य रात्रि में मरीज की स्थिति नाजुक होने के बाद उसे बेगूसराय रेफर किया गया, परंतु रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। फिर भी स्वजन उसे बेगूसराय ले गए, जहां डाक्टरों ने महिला की मौत का कारण गलत आपरेशन बताया।

बेगूसराय के डॉक्टर के मुताबिक यूट्रस नली की जगह पेशाब नली को काटकर उसे बांध दिए जाने की जानकारी स्वजनों को दी गई। जिससे मृतका के स्वजन काफी आक्रोशित हो गए और बखरी स्थित डॉक्टर के क्लीनिक में भारी बवाल काटते हुए तोड़फोड़ की। हो हंगामा के बाद डॉक्टर के दलाल, बिचौलिए जमा हो गए। सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंची। बंद कमरे में महिला के शव की बोली लगाई गई। फिर सभी अपना अपना हिस्सा लेकर मामले को रफा-दफा कर दिया। घटना को लेकर लोगों के बीच दिनभर चर्चा होती रही।

एक सप्ताह पूर्व भी अबार्सन के दौरान युवती की हुई थी मौत

सवाल यह कि इस तरह का खेल आखिर कब तक चलता रहेगा। एक सप्ताह पूर्व भी बाजार के एक नर्सिंग होम में अबॉर्सन के दौरान एक युवती की मौत के बाद स्वजनों को बदनामी का भय दिखाकर तथा उसे कुछ रुपये देकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया था। मालूम हो कि बखरी में संचालित अधिकांश निजी क्लीनिकों के दलालों का बड़ा गिरोह काम कर रहा है। जिनमें कुछ आशा कार्यकर्ता के साथ-साथ कई सफेदपोश भी शामिल हैं। इनके बलबूते इस तरह का खेल आम है। इन क्लीनिकों में स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के विपरीत जिन डॉक्टरों को घाव के चीरफाड़ की अनुमति नहीं है वे बड़े-बड़े आपरेशन कर डालते हैं। इन क्लीनिकों के संचालक अप्रशिक्षित नर्सों को मोहरा बनाकर महिलाओं को भी सभी तरह के आपरेशन करने से बाज नहीं आते हैं। क्षेत्र के लोगों की गरीबी और अशिक्षित होने के कारण इस तरह के डॉक्टरों का धंधा यहां खूब फल फूल रहा है। परंतु, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस ओर से पूरी तरह अनभिज्ञ बना हुआ है।

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