बिहार विधानसभा चुनाव 2020
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बिहार विधानसभा चुनाव 2020 : बिहार में बड़े सियासी घरानों की लड़ाई का केंद्र बनेगा उत्तर बिहार, लालू-राबड़ी व पासवान-हजारी-राम घरानों के लड़ाके मैदान- ए- जंग में

सूबे के बड़े सियासी घरानों की लड़ाई का केन्द्र उत्तर बिहार बनेगा। पूर्व मुख्यमंत्री लालू-राबड़ी परिवार, केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान, पूर्व सांसद रामसेवक हजारी एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री वालेश्वर राम के परिवार के लड़ाकों की जंग पर सबकी नजर रहेगी। दरभंगा-समस्तीपुर की कई सीटों पर दल कोई भी हो, पासवान, हजारी एवं राम परिवार के लड़ाकों को ही प्राय: सिंबल मिलता है। मिथिलांचल में पूर्व केन्द्रीय मंत्री ललित नारायण मिश्रा और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा के वारिस खोई विरासत को दोबारा हासिल करने के लिए जमीन तलाश रहे हैं। कहीं सरकार बचाने-गिराने की ब्यहू रचना हो रही तो कहीं विरासत बचाने की बेचैनी है।
यूं तो राज्य भर में मिलने वाली सीटों के आधार पर राजद का भविष्य तय होगा, परन्तु लालू प्रसाद की विरासत वैशाली जिले के वोटरों के हाथ में है। लालू प्रसाद के पुत्र एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव वैशाली के राघोपुर के विधायक हैं। इस बार सबकी नजर राघोपुर पर होगी। लालू प्रसाद के बड़े पुत्र एवं पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव वैशाली के महुआ से दावेदार हैं।  
समस्तीपुर और दरभंगा की अलग-अलग आरक्षित सीटों पर रामविलास पासवान और स्व. रामसेवक हजारी के  परिवार के सदस्यों की भिड़ंत होती रही है। विधानसभा चुनाव 2015 में दरभंगा के कुशेश्वर स्थान सीट पर जेडीयू के शशिभूषण हजारी ने रामविलास पासवान के दामाद मृणाल पासवान (लोजपा) को शिकस्त दी। इसी सीट पर 2010 में शशिभूषण हजारी ने रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान को शिकस्त दी थी। शशिभूषण हजारी के भतीजा एवं राज्य सरकार के मंत्री महेश्वर हजारी ने 2015 में समस्तीपुर की कल्याणपुर सीट पर रामचंद्र पासवान के पुत्र प्रिंस राज को शिकस्त दी थी। महेश्वर हजारी एक बार सांसद व तीन बार विधायक बने। उनके पिता रामसेवक हजारी एक बार सांसद और 6 बार विधायक रहे। रामसेवक हजारी की बहू एवं पूर्व विधायक मंजू हजारी पिछली बार रोसड़ा सीट पर कांग्रेस के अशोक राम से पराजित हुई थीं और एक बार फिर टिकट की दावेदार हैं।

कुशेश्वर स्थान पर तीन घरानों की नजर
कुशेश्वर स्थान में लड़ाई दिलचस्प होगी। पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. वालेश्वर राम के पुत्र डॉ. अशोक कुमार अभी रोसड़ा के कांग्रेस विधायक हैं। इससे पहले वे पांच बार सिंघिया से चुनाव जीत चुके हैं। उनके पिता भी तीन बार विधायक निर्वाचित हुए थे। सिंघिया से 1995 में रामविलास पासवान के ममेरे भाई जगदीश पासवान भी जद विधायक निर्वाचित हुए थे। विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के बाद सिंघिया निर्वाचन क्षेत्र नहीं रहा। अब कुशेश्वर स्थान दलित राजनीति की लड़ाई का मैदान बनता है। कुशेश्वर स्थान पर अशोक राम की भी नजर है। वहां शशिभूषण हजारी जेडीयू विधायक हैं और समस्तीपुर के सांसद प्रिंस राज के बड़े भाई कृष्ण राज भी लोजपा टिकट के दावेदार हैं।  

फिर पैर जमाना चाहता ललित बाबू का परिवार
पिछले चुनाव में पूर्व केन्द्रीय मंत्री ललित नारायण मिश्रा के पौत्र ऋषि मिश्रा दरभंगा की जाले सीट पर जेडीयू उम्मीदवार थे,परन्तु भाजपा के जीवेश मिश्रा से हार गए। बेटे को विधानसभा भेजने के लिए पूर्व विधायक विजय कुमार मिश्र फिर सक्रिय हैं। डॉ. जगन्नाथ मिश्र के पुत्र एवं पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा पिछली बार भाजपा टिकट पर झंझारपुर में हार गए और फिर टिकट के लिए प्रयासरत हैं।

फातमी-मेहता की होगी अग्निपरीक्षा
पूर्व केन्द्रीय मंत्री अली अशरफ के पुत्र डॉ. फराज फातमी पिछली बार राजद टिकट पर केवटी से जीते। फातमी राजद छोड़कर जेडीयू में आ गए। बेटे को पुन: जीत दिलाने में उनकी अग्नि परीक्षा होगी। पूर्व मंत्री तुलसी दास मेहता के पुत्र एवं पूर्व सांसद आलोक मेहता पिछली बार जेडीयू की मदद से उजियारपुर से राजद विधायक बने। उनके सामने जेडीयू-भाजपा की संयुक्त मोर्चाबंदी होगी।

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Kunal Raj
Editor-In-Chief l Software Engineer l Digital Marketer