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बिहार: औद्योगिक विकास और रोजगार के लिए राज्य में नई टेक्सटाइल नीति जल्द, जानिए, कैसा होगा प्रारूप

बिहार में नई टेक्सटाइल नीति जल्द लाई जा रही है। उद्योग विभाग ने इसका प्रारूप तैयार कर लिया है। प्रदेश में निवेश करने वाली टेक्सटाइल कंपनियों के लिए इसमें कई तरह की रियायत और प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। रोजगार सृजन से लेकर प्रदेश से निर्यात के विकास तक पर प्रोत्साहन राशि तय की गई है। प्रारूप के तहत निहित प्रावधानों पर विशेषज्ञों से भी राय ली गई है। राज्य मंत्रिपरिषद की सहमति के बाद इसे लागू किया जाएगा। प्रारूप में कृषि, भवन निर्माण, तकनीकी उपकरणों, रक्षा जरूरतों, फर्नीचर और घरेलू जरूरतों, औद्योगिक उपयोग, मेडिकल उपयोग, पर्यावरण संरक्षण, पैकेजिंग, सुरक्षा उपकरणों और खेल जरूरतों के लिए खास तकनीक वाले वस्त्रों के निर्माण पर भी खास फोकस किया गया है। टेक्सटाइल उद्योगों को चार कैटेगेरी में बांटकर उनके लिए रियायत और प्रोत्साहन का प्रावधान है। इसके अलावा लैंड कनवर्सन से लेकर स्टांप ड्यूटी, कौशल विकास और पेटेंट रजिस्ट्रेशन तक में रियायत का प्रावधान किया गया है।

टेक्सटाइल कंपनियों को प्रति कर्मचारी हर माह तीन हजार तक देगी सरकार

बिहार निवासी एक व्यक्ति को नौकरी देने पर राज्य सरकार टेक्सटाइल कंपनियों को हर महीने 800 रुपए से तीन हजार रुपए तक दे सकती है। अलग-अलग कैटेगेरी में निवेश करने वाली टेक्सटाइल कंपनियों को रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहन राशि देने की तैयारी राज्य सरकार कर रही है। बिहार की प्रस्तावित टेक्सटाइल पॉलिसी में इसकी व्यवस्था की गई है।

चार कैटेगरी में बांटी गयी कंपनियां

टेक्सटाइल कंपनियों को चार कैटेगरी में बांटा गया है। इनमें रोजगार पर सबसे अधिक प्रोत्साहन राशि का प्रावधान बी 1 और बी 2 कैटेगरी की कंपनियों के लिए किया गया है। इसके तहत अपेरल, गार्मेंट व चमड़े की सामग्री बनाने वाली कंपनियों को शामिल किया गया है। इनमें दो हजार से अधिक लोगों की प्रत्यक्ष नियुक्ति करने वाली कंपनियों में एससी, एसटी, ईबीसी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, महिला, दिव्यांग, युद्ध विधवा, एसिड अटैक पीड़ितों और किन्नरों को नौकरी देने पर प्रत्येक के लिए हर महीने तीन हजार रुपए सरकार देगी। इसी तरह की कंपनियों में बाकी लोगों को नौकरी देने पर सरकार हर एक के लिए 2800 रुपए प्रति माह देगी। इसी तरह ए 1 और ए 2 कैटेगरी की कंपनियों की कर्मचारी संख्या की श्रेणी के आधार पर राज्य सरकार हर कर्मचारी को नौकरी पर रखने के बदले प्रति माह 800 रुपए से दो हजार रुपए तक देगी।

प्लांट-मशीनरी में निवेश का 35 फीसदी तक देगी सरकार

प्रस्तावित टेक्सटाइल पॉलिसी में कैपिटल सब्सिडी के रूप में 35 फीसदी तक का अनुदान राज्य सरकार के खजाने से देने का प्रावधान किया गया है। यह अनुदान प्लांट-मशीनरी में निवेश पर मिलेगा। ए 1 कैटेगरी की कंपनियों में एक करोड़ से कम के माइक्रो यूनिटों में प्लांट मशीनरी पर होने वाले निवेश में 35 फीसदी तक प्रोत्साहन राशि राज्य सरकार देगी। हालांकि ऐसी यूनिटों के लिए प्रोत्साहन राशि 25 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। अलग-अलग कैटेगेरी में अलग-अलग निवेश के आधार पर अलग-अलग कैपिटल सब्सिडी तय की गई है। ए 1 कैटेगेरी में 500 करोड़ निवेश वाली यूनिटों पर यह राशि 45 करोड़ तक है। ए 2 कैटेगेरी में 500 करोड़ तक के निवेश पर 50 करोड़ तक के अनुदान का प्रावधान है।

ब्याज पर भी 10 फीसदी तक अनुदान

बैकों से कर्ज ली गई राशि पर सरकार 10 फीसदी तक अनुदान अपने खाते से देगी। यह अनुदान पांच साल तक मिलेगा। स्टेट जीएसटी में भी सरकार नई इकाइयों को पांच साल तक दे सकती है। इसी तरह बंदरगाहों से परियोजना स्थल तक लाने में नई इकाइयों को 15 लाख तक सरकार किराए में पांच साल तक भुगतान करेगी। बिजली बिल में सरकार 10 लाख तक छूट दे सकती है। इसी तरह पेटेंट रजिस्ट्रेशन, कौशल विकास अनुदान, स्टांप ड्यूटी शुल्क में छूट के कई प्रावधान किए गए हैं।

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