Agriculture
बिहार

कृषि उद्योग के लिए दो विभागों से ले सकते हैं अनुदान, बिहार सरकार ने पहली बार की व्यवस्था

कृषि उद्योग लगाने के इच्छुक उद्यमी दो अनुदानों का लाभ ले सकते हैं। राज्य सरकार ने पहली बार नई कृषि निवेश नीति में यह व्यवस्था की है। उद्यमी अगर इस नीति के तहत निवेश करेंगे तो पूंजीगत अनुदान उन्हें 25 प्रतिशत तक मिलेगा। साथ में, उद्योग विभाग से मिलने वाले सूद पर अनुदान का लाभ भी वह ले सकते हैं। शर्त यही है कि दोनों अनुदान अलग-अलग तरह के हों। कृषि विभाग से अनुदान लेने के बाद वह दूसरी जगह से पूंजीगत अनुदान नहीं ले सकते।

राज्य सरकार ने कृषि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई नई नीति में उद्यमियों को सहूलियत देने के लिए कई तरह की व्यवस्था की है। कृषि विभाग से अनुदान लेने के लिए वह अपने प्रोजेक्ट की लागत में जमीन की कीमत भी जोड़ सकते हैं। अनुदान उस पर भी मिलेगा। शर्त यही है कि जमीन की कीमत कुल लागत पूंजी से दस प्रतिशत से अधिक नहीं हो।

दो तरह के अनुदान लेने पर सरकार ने कैपिंग लगाई है। सामान्य व्यक्ति दोनों अनुदान मिलाकर 50 प्रतिशत तक पैसा सरकार से ले सकता है। यानी दानों अनुदान जोड़कर 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। उद्यमी अगर अनुसूचित जाति या जनजाति का है तो कैपिंग 55 प्रतिशत तक होगी। महिला और थर्ड जेन्डर के लिए 52 और फार्मर्स प्रोड़्यूसर कंपनी के लिए कैपिंग 60 प्रतिशत है।

इस योजना के तहत 25 लाख से पांच करोड़ तक का उद्योग लगाया जा सकता है। इसमें किसी खास व्यक्ति को उद्योग लगाने पर लागत पूंजी का 15 प्रतिशत, फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी को 25 प्रतिशत तक अनुदान सरकार देगी। महिलाओं के मामले में दो प्रतिशत और अनुसूचित जाति जन जाति को पांच प्रतिशत अधिक अनुदान मिलेगा।

सरकार ने इस नीति में उद्योगों को भी चिह्नित किया है। मक्का प्रोसेसिंग इकाइयों में पशु चारा और मत्स्य चारा को ही प्राथमिकता है। हालांकि कॉर्न फ्लैक्स जैसे खाद्य भी बना सकते हैं। इसके अलावा भी प्रोसेसिंग के लिए उद्योग चिह्नि हैं। आवेदन की तारीख भी जल्द निकलेगी। आवेदन ऑनलाइन करना होगा।

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