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कोरोना काल में बदल रहा ट्रेंड, छह किलोमीटर तक यात्रा साइकिल से करने की सिफारिश

कोरोना काल में साइकिल की ओर लोगों का रुझान देखते हुए इसे हमें अवसर की तरह देखना चाहिए। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर) द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि मेट्रो 50 फीसदी क्षमता के साथ शुरू करने के बाद छह किलोमीटर तक की यात्रा करने वाले लोगों को साइकिल के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए सड़कों पर अस्थायी साइकिल ट्रैक की व्यवस्था, पुराने ट्रैक की मरम्मत होनी चाहिए। चौराहों पर साइकिल सवारों के लिए अलग से सिग्नल और अन्य व्यवस्था करनी होगी। अगर ऐसा किया गया तो 2023 तक साइकिल सवारों की संख्या में 15 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।

मेट्रो यात्रियों में कमी नहीं 
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर साइकिल या मोटर रहित वाहनों को बढ़ावा मिलता है और सड़क संरचना में बदलाव किया जाता है तो भी अगले तीन सालों में 2023 तक मेट्रो के यात्रियों में ज्यादा कमी नहीं आएगी। इनमें केवल 1 प्रतिशत की कमी देखी जाने की संभावना है। 

पैदल यात्री घटेंगे 
मोटर रहित वाहनों को बढ़ावा मिलने पर पैदल यात्रियों की संख्या और बस से चलने वालों में पांच-पांच फीसदी तक की कमी आएगी। रिक्शा से चलने वालों में कोई कमी नहीं आएगी। कार से चलने वालों में एक प्रतिशत की कमी आएगी। यहां बता दें कि दिल्ली में हर साल सड़क हादसों में सबसे अधिक मरने वालों की संख्या पैदल यात्रियों की होती है। इस वर्ष 1 जनवरी से 31 जुलाई तक कुल 243 पैदल यात्रियों की जान जा चुकी है। 

गृहराज्यों पर निर्भर 
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रवासियों का लौटना उनके गृह राज्यों में महामारी संकट पर भी निर्भर करेगा। वापस आना उनके नौकरी के अवसरों पर आधारित होगा। इसके अलावा सरकारी और निजी दफ्तर न्यूनतम आवश्यक कर्मचारियों के साथ काम करते रहेंगे। इनका खोलना सरकारों के आगे के निर्णयों का विषय है। रिपोर्ट में दिए दिशा-निर्देश गतिशील हैं। जो बदलती मांग और आपूर्ति संयोजन के आधार पर बदलते रहेंगे।

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