समस्तीपुर

हर्षोल्लास के साथ मना आस्था का पर्व चौठचंद्र

समस्तीपुर। मिथिला अपनी सभ्यता, संस्कृति एवं पर्व-त्योहारों की परंपराओं को लेकर प्रसिद्ध है। वैदिक काल से ही मिथिलांचल में पर्व-त्योहारों की अनुपम परंपरा रही है। मिथिला के त्योहारों में धार्मिक एवं ऐतिहासिक भावनाएं जुड़ी है। जो हमारी सांस्कृतिक चेतना को अक्षुण्ण रखती है। ऐसे ही त्योहारों में से एक है मिथिलांचल का प्रसिद्ध पर्व चौठ चंद्र। इसे स्थानीय मैथिली भाषा में चौरचन कहा जाता है। शनिवार को आस्था का पर्व चौरचन प्रखंड क्षेत्र में काफी धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया गया। इस दौरान महिलाएं और बच्चे सुबह से ही गाय के गोबर से आंगन एवं घरों को लीपकर शुद्ध बनाते देखे गए। भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को विधि-विधान के साथ मनाए जाने वाले इस पर्व की मान्यता है कि चौठ चंद्र व्रत की उपासना करने से मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है। इस संबंध में मातृ उद्बोधन आश्रम यारपुर पटना से सम्बद्ध हसनपुर प्रार्थना समिति के प्रभारी पंडित नर्मदेश्वर झा ने बताया कि स्कन्द पुराण में भी चौठ-चंद्र की पद्धति और कथा का वर्णन है। खास बात यह कि छठ की तरह चौठ चंद्र पूजा को भी महिलाएं ही करती हैं। इस दिन महिलाओं एवं बच्चों में विशेष उमंग देखने को मिलता है।इस दिन कच्चे चावल को पीसकर पिठार बनाती है। जिससे घर के आंगन या छत पर पूजा स्थल को आकर्षक अहिपन यानी रंगोली से सजाने के बाद निष्ठा पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है।

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