दुनिया

अपनी हरकतों का खामियाजा भुगत रहा चीन, ड्रैगन को भारी नुकसान; हथियार खरीदने से बच रहे देश

पिछले कुछ सालों में भारी उछाल के बाद चीन के हथियार निर्यात में कमी आ गई है। साल 2004 से 2013 के बीच चीन के हथियार निर्यात में करीब तीन गुना की बढ़ोतरी देखी गई थी। लेकिन 2014-2018 तक सिर्फ 2.7 फीसद की बढ़ोतरी देखी गई है। द नेशनल इंटरेस्ट में लिखते हुए माइकल पेक ने कहा है कि एशिया में चीन की अधिक आक्रामक विदेश नीति ने उसके हथियारों के निर्यात में बाधा उत्पन्न की है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) वैश्विक सैन्य ताकत और हथियारों के खर्च के अनुमानों को संकलित करती है। SIPRI की रिपोर्ट बताती है कि चीन अपने हथियार इसलिए नहीं बेच पा रहा क्योंकि 2014-2018 के दौरान टॉप 10 हथियार खरीदने वाले देशों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और वियतनाम ने राजनीतिक सहित अन्य कारणों से चीन से हथियार नहीं खरीदे हैं।

डोमेस्टिक ड्रोन मॉडल्स बेचने में सफल रहा है चीन

हालांकि चीन के हथियारों का निर्यात धीमा है लेकिन ड्रैगन ने पिछले एक दशक में विकासशील देशों को डोमेस्टिक ड्रोन मॉडल्स बेचने में सफल रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2014-2018 के दौरान चीन मानव रहित लड़ाकू हवाई विमानों (UCAVs) के बाजार का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन गया है। चीन ने 2009-13 के दौरान 2 देशों को 10 UCAVs बेचे थे लेकिन 2014-2018 के दौरान चीन ने 13 से अधिक देशों को 153 UCAVs बेचे हैं। इन 13 देशों में 5 मध्य एशिया के देश मिस्र, इराक, जॉर्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात हैं। अमेरिका की बात करें तो 2009-13 के बीच अमेरिका ने 3 और 2014-18 के बीच 5 UCAVs बेचे हैं। 

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