पटना बिहार

पटना का हाल बेहाल! आईसीयू-वेंटिलेटर की कमी से दम तोड़ रहे कोरोना संक्रमित, सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों से लौटाए जा रहे मरीज

चाहे मरीजों का ऑक्सीजन स्तर घटे या फिर अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर। दोनों की परिस्थितियों में परेशानी मरीजों को उठानी पड़ रही है। पटना के अस्पताल ऐसे मरीजों को भर्ती करने से साफ इंकार कर रहे हैं। कारण उनके पास आईसीयू बेड नहीं हैं। ऐसे मरीज अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस में ही जिंदगी और मौत के बीच जूझने को विवश हैं। कई भर्ती होने के इंतजार में ही दम तोड़ देते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट की फटकार के बाद पीएमसीएच और आईजीआईएमएस में बढ़े बेड का कोई फायदा गंभीर मरीजों को नहीं मिल रहा है, क्योंकि आईसीयू बेड जस की तस हैं। 

आरा के किसी गांव से आए कोरोना संक्रमित राहुल कुशवाहा के परिजन आईजीआईएमएस के बाहर दहाड़ मारकर रो रहे थे। पूछने पर पता चला कि गंभीर हालत में उन्हें एक निजी अस्पताल ने आईजीआईएमएस में भेज दिया। अब यहां आईसीयू बेड की उपलब्धता नहीं होने पर उन्हें भर्ती नहीं लिया गया। राहुल की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि 33 साल का राहुल अपने परिवार का इकलौता लड़का था। 

पीएमसीएच में आए दिन कई मरीज आईसीयू की कमी के कारण दम तोड़ रहे हैं। वहां कार्यरत एक वरीय डॉक्टर ने बताया कि केवल 25 बेड का आईसीयू है और प्रतिदिन लगभग 40 से 50 ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनकों आईसीयू की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीज बिना इलाज के दम तोड़ रहे हैं। पीएमसीएच में कोरोना के नोडल पदाधिकारी डॉ. अरुण अजय ने बताया कि जितनी क्षमता है, उतना आईसीयू बेड पर भर्ती लिया जा रहा है। अगर कोई ऑक्सीजन के सपोर्ट पर ठीक हो सकता है तो ऐसे मरीजों को लौटाया नहीं जाता है।  

आईसीयू के इंतजार में तड़प रहा मरीज
राज्य के अलग-अलग जिले से आकर किसी तरह आईजीआईएमएस में भर्ती कई मरीज गंभीर हालत में आईसीयू के इंतजार में तड़प रहे हैं। भागलपुर से आई सुमित्रा देवी हों या पटना के सुभग कुमार (बदला हुआ नाम) दोनों मरीज सामान्य वार्ड में भर्ती हैं। आईसीयू के लिए अधीक्षक व अन्य डॉक्टरों से इनके परिजन गुहार लगा रहे हैं। लेकिन आईजीआईएमएस में मात्र 55 बेड आईसीयू-वेंटिलेटर का होने के कारण अस्पताल प्रशासन उन्हें बेड देने में असमर्थ हो रहा है। आईजीआईएमएस के अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि आईसीयू में बेड की कमी की वजह से 85 ऑक्सीजन को मानक बनाया गया है। इससे कम ऑक्सीजन लेवल वाले मरीज को जांच के बाद दूसरी जगह ले जाने की सलाह दी जा रही है। उन्हें भर्ती नहीं लिया जा रहा है। 

आईजीआईएएमस में पीएम केयर के 30 वेंटिलेटर खराब
कुछ माह पहले आईजीआईएमएस को पीएम केयर से 50 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। इन्हें आईसीयू वार्ड में लगाया जाना था। अस्पताल के निदेशक डॉ. एनआर विश्वास ने बताया कि 50 वेंटिलेटर में से 30 वेंटिलेटर कोई काम का नहीं था। उन्हें खराब वेंटिलेटर सप्लाई कर दी गयी थी। ये वेंटिलेटर स्टोर में बेकार पड़े हैं। बताया कि किसी में कई पार्ट भी गायब हैं। 

पीएमसीएच में नहीं बढ़ी आईसीयू बेडों की संख्या
पीएमसीएच में जब 100 बेड का कोविड वार्ड बना था तो उस समय 50 बेड पर आईसीयू-वेंटिलेटर लगाने की योजना थी। प्राचार्य डॉ. बीपी चौधरी ने बताया कि पीएम केयर फंड से बीएमएसआईसीएल से मात्र 25 वेंटिलेटर ही मिले थे जिसे कोविड वार्ड के आईसीयू में लगाया गया है। कहा कि राजेंद्र सर्जिकल वार्ड में 500 बेड का कोविड वार्ड तैयार हो रहा है। इसमें लगभग 50 बेड आईसीयू के होंगे। 

करीब एक हजार आईसीयू बेड
पटना के कोविड अस्पतालों में कुल 3800 बेड पर मरीजों का उपचार चल रहा है। इसमें करीब एक हजार आईसीयू और वेंटिलेटर बेड हैं। इसमें पटना एम्स, पीएमसीएच, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस सहित 91 निजी अस्पताल हैं। इसके अलावा बिहटा ईएसआईसी, पाटलिपुत्रा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, राजेंद्र नगर नेत्र अस्पताल, पाटलिपुत्रा अशोक होटल, कंगन घाट सहित अनुमंडलों में कोविड केयर सेंटर पर भी सामान्य मरीज भर्ती किए जा रहे हें। पटना के कोविड केयर सेंटरों में ऑक्सीजन बेड की सुविधा दी जा रही है। हालांकि कोविड केयर सेंटरों में भी स्थिति गंभीर होने पर मरीज एंबुलेंस में भटकने को विवश है। 

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