समस्तीपुर

समस्तीपुर : कोरोना की दोहरी मार, मक्का उत्पादक किसान लाचार

समस्तीपुर । कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में सरकार ने किसानों के हितों का ध्यान रखा, फिर भी कोरोना के कहर की मार से किसान बच नहीं पाए। पॉल्ट्री फीड इंडस्ट्री की मांग नहीं होने से किसान औने-पौने दाम पर मक्का बेचने को मजबूर हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि सही मायने में कृषि व संबंधित गतिविधियों से जुड़े किसानों पर कोरोना की दोहरी मार पड़ी है। व्यापक पैमाने पर पोल्ट्री का व्यवसाय ठप पड़ जाने से इससे जुड़े किसान तबाह हैं। जिले के प्रमुख मक्का लदान स्टेशन की हालत कुछ यही दर्शा रही।

यहां के किसानों ने जहां गत वर्ष 2000 रुपये प्रति क्विटल से अधिक कीमत पर उसे बेचा था, वहीं इस साल उन्हें 1000-1200 रुपये प्रति क्विटल पर बेचना पड़ रहा। हसनपुर, बिथान से सटे खगड़िया, मधेपुरा, पूर्णिया, खगड़िया और आस-पास के जिलों में रबी सीजन में मक्के की खेती व्यापक पैमाने पर होती है। इस साल भी वहां मक्के की अच्छी पैदावार हुई। हसनपुर स्टेशन से देश के विभिन्न प्रांतों में मक्के की सप्लाई होती थी। लेकिन, लॉकडाउन के कारण परिवहन की समस्या और पोल्ट्री इंडस्ट्री की मांग समाप्त होने के कारण यहां से मक्के की सप्लाई इस बार नहीं हो रही। हसनपुर क्षेत्र में अभी तक इस दर पर मक्के की खरीद नहीं हो हुई। इस कारण हसनपुर रेलवे रैक प्वाइंट भी खामोश रहा। वाणिज्य विभाग के आंकड़े भी कुछ यही प्रदर्शित कर रहे। जबकि, पिछले ही वर्ष यहां बाहर के किसानों की भीड़ लगी रहती थी।

समस्तीपुर- खगड़िया रेलखंड के हसनपुर रोड रेलवे स्टेशन स्थिति रैक प्वाइंट का संचालन हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्वी भाग के बेलसंडी, सलहाबुजुर्ग, सलहाचंदन, नरपा, पुसहो, सोहमा, जगमोहरा आदि पंचायतों के किसानों पर निर्भर करती है।

मक्का उत्पादन का प्रमुख उत्पादक केंद्र है बिथान

करेह, कमला, कोसी और बागमती नदी के संगम स्थल पर अवस्थित बिथान प्रखंड मक्का उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। जहां चार जिले दरभंगा, सहरसा, सुपौल और खगड़िया व चार नदियों का संगम है। यहां के किसान सबसे ज्यादा मकई की खेती करते हैं। इन किसानों ने पिछले साल 2000 रुपये प्रति क्विटल से अधिक कीमत पर मक्का बेचा था। वहीं, इस साल उन्हें 1000-1200 रुपये प्रति क्विटल पर बेचना पड़ रहा। सीमांचल के इन चारों जिलों के मक्के की मांग बेंगलुरु, दिल्ली, लुधियाना, चंडीगढ़, उत्तराखंड के साथ बांग्लादेश तक होती थी। मुर्गियों के दाना तैयार करने वाली फैक्ट्रियों के साथ पशु आहार बनाने वाली फैक्ट्री में इसकी काफी डिमांड होती थी। इस कारण हसनपुर रैक प्वाइंट से बेगूसराय जिले के सलौना के मई माह के अंत तक ही लाखों क्विटल मक्का भेज दिया जाता था। इस बार लॉकडाउन के चलते व मुर्गियों की दानों की डिमांड में कमी रहने के कारण किसानों को कम कीमत पर मक्का बेचना पड़ रहा है। इस वर्ष 18 जून तक हसनपुर रेलवे स्टेशन स्थित रैक प्वाइंट से एक भी मक्के की मालगाड़ी की रैक नहीं लग सकी है।

4000 हेक्टेयर में हुई मक्के की खेती, कीमत नहीं मिलने से नहीं खुली एक भी रैक

बिथान प्रखंड कृषि पदाधिकारी जयकुमार राम ने बताया कि बिथान प्रखंड में किसानों ने 1400 हेक्टेयर में मक्का की खेती की। वहीं, दरभंगा जिले के कुशेश्वर स्थान प्रखंड के 2000 हेक्टेयर, खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड के 1000 हेक्टेयर, सुपौल जिले के 500 हेक्टेयर में किसानों द्वारा लगाए गए मक्के के दाने को हसनपुर रैक प्वाइंट पर बेचा जाना चाहिए। मगर, मक्के की कम दर रहने की वजह से किसान बेचना नहीं चाह रहे। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा मक्के का समर्थन न्यूनतम मूल्य 1760 रुपया तय किया गया है। माल अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष मई में दो रैक, जून माह में नौ रैक एवं जुलाई में चार रैक मक्के की लोडिग कर अन्य प्रदेश को भेजी गई थी। इस वर्ष अब तक मक्का रैक का खाता भी नहीं खुल सका। हालांकि, इसकी भरपाई गिट्टी की रैक से हो रही।

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