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बिहार

जमीन-फ्लैटों की खरीद-बिक्री पर भी कोरोना का असर, बिहार सरकार को 1 हजार करोड़ का नुकसान

बिहार में कोराना का व्यापक असर जमीन-फ्लैटों की खरीद-बिक्री पर पड़ा है। कोराना के कारण अप्रैल से दिसबंर तक गत वर्ष के 9 माह की तुलना में इस साल करीब सवा तीन लाख कम फ्लैट-जमीन का निबंधन हुआ। इससे सरकार को भी लगभग एक हजार करोड़ का नुकसान हुआ। 

राज्य में लॉकडाउन खुलने के बाद जमीन और फ्लैटों की रजिस्ट्री में तेजी आई है। बावजूद कोरोनाकाल के दौरान हुई क्षति की पूर्ति करना आसान नहीं है। वैसे लॉकडाउन खुलने के बाद खरीद-बिक्री में सुधार का आलम यह है कि सितम्बर में निबंधन का नया रिकॉर्ड बना। इस महीने में 1.12 लाख जमीन और फ्लैट का निबंधन हुआ। इससे सरकार को भी 438 करोड़ राजस्व की प्रप्ति हुई। उस महीने का लक्ष्य मात्र 320 करोड़ रुपये का था।

निबंधन विभाग लॉकडाउन की दुश्वारियों से उबर रहा है, लेकिन शत-प्रतिशत लक्ष्य पाना अब भी कठिन है। गत वर्ष अप्रैल से 15 दिसम्बर तक राज्य में 8 लाख 71 हजार 812 फ्लैट-जमीन का निबंधन हुआ था। निबंधन से सरकार को 3290 करोड़ रुपये मिले थे। लेकिन इस वर्ष उस अवधि में मात्र 5 लाख 59 हजार 580 फ्लैट-जमीन का ही निबंधन हुआ, जिससे 2266 करोड़ रुपये ही राजस्व की प्राप्ति हुई। इस अवधि में पिछले साल की तुलना में 3 लाख 12 हजार 232 फ्लैट-जमीन कम निबंधित हुए। इससे सरकार को 1024 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 

कारोना का कहर तेज हुआ तो इस वर्ष अप्रैल में मात्र 170 और मई में 11.40 हजार फ्लैट-जमीन का ही  निबंधन हुआ था। लेकिन विभाग द्वारा दी गई सुविधाओं के कारण लॉकडाउन में ढील मिलते ही सारा रिकॉर्ड टूट गया। जो काम अप्रैल और महीने में रुके थे वह सभी एक साथ पहुंचने लगे। लिहाजा ऐसी तेजी आई कि सितम्बर महीने में नया रिकॉर्ड बन गया।  

विभाग ने निबंधन कार्यालयों में जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए पहले समय देना शुरू किया है। कोई भी व्यक्ति अपना कागज जमा करता है उसके बाद निबंधन के लिए उसे दिन और समय तय कर बताया जाता है। तय समय पर आने वाले क्रेता और विक्रेता को कोई समय नहीं लगता है और निबंधन का काम जल्द पूरा हो जाता है। विभाग की इस प्रक्रिया से लोगों की बड़ी परेशानी दूर हो गई। समय की बचत होने के साथ भीड़ से भी बचने का उपाय हो गया।

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