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बिहार में छह दशक बाद कृषि शिक्षा परिषद बहाल, सिलेबस निर्धारण समेत जानें और क्या होगी जिम्मेदारी?

बिहार सरकार ने कृषि शिक्षा पर नजर रखने के लिए राज्य कृषि शिक्षा परिषद का गठन कर दिया है। महत्व को देखते हुए राज्य में इस परिषद को 60 वर्षों के बाद फिर बहाल किया गया है। अब छह दशक बाद यह परिषद विश्वविद्यालयों में होने वाली कृषि की पढ़ाई को छोड़कर अन्य संस्थानों में हो रही पढ़ाई व प्रशिक्षण कोर्स पर नजर रखेगी।

उनकी परीक्षा संचालन और सिलेबस निर्धारण की जिम्मेवारी भी इस परिषद के पास होगी। इसके लिए परिषद में कृषि व शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ किसानों को भी जगह दी गई है। किसानों के प्रतिनिधि क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से कोर्स का सिलेबस बनाने में मदद करेंगे। 

गौरतलब है कि सरकार ने राज्य में कृषि शिक्षा पर नजर रखने को एक परिषद की जरूरत 1961 में महसूस की थी। उस समय इसकी नियमावली बनी, गठन भी हुआ, पर काम नहीं हो सका। यानी उस समय भी सरकार को स्नातक से नीचे स्तर में कृषि की पढ़ाई की जरूरत महसूस हुई थी, लेकिन परिषद को भंग करने का मुख्य कारण था कि स्नातक से नीचे कृषि की पढ़ाई उस समय राज्य में शुरू नहीं जा सकी। लिहाजा कुछ ही समय बाद इस परिषद की उपयोगिता समाप्त हो गई।

परिषद की जिम्मेवारी परीक्षा लेने की भी 
परिषद की जिम्मेवारी इन शिक्षा व्यवस्था को संचालित करने के साथ परीक्षा लेने की भी होगी। किसी भी कोर्स का सिलेबस बनाने में परिषद को वर्तमान जरूरत के साथ भविष्य में संभावित बदलाव को भी ध्यान रखना होगा। 

कृषि निदेशक अध्यक्ष तो उप निदेशक होंगे सचिव 
कृषि सचिव डॉ. एन सरवण कुमार ने परिषद का अध्यक्ष कृषि निदेशक आदेश तितरमारे को बनाया है। सचिव के रूप में उप निदेशक अनिल झा काम करेंगे। उद्यान निदेशक भूमि सरंक्षण निदेशक, बामेती निदेशक, राज्य के दोनों कृषि विश्वविद्यालयों के प्रसार शिक्षा निदेशक, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशक, एससीईआरटी निदेशक, प्रसार प्रशिक्षण केन्द्र मुजफ्फरपुर के प्राचार्य, अपर कृषि निदेशक और राज्य के चारों जलवायु क्षेत्र के एक-एक किसान प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे। 

स्नातक से नीचे की कृषि शिक्षा पर रखेगी नजर 
राज्य में एनडीए सरकार ने दूसरे कृषि रोडमैप से ही राज्य में इंटर कृषि के साथ स्कूल स्तर पर भी कृषि की पढ़ाई शुरू कर दी है। कृषि रोडमैप में प्रसार शिक्षा पर भी काफी जोर है। सरकार के इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए बामेती जैसी संस्थाएं कई सर्टिफिकेट कोर्स भी चला रही हैं। बामेती में किसानों के साथ कृषि उत्पाद की मार्केटिंग करने वालों के लिए भी कोर्स है। अब पढ़ाई कराने वाली संस्था ही सिलेबस बनाए व वही परीक्षा ले, इसमें अनियमितता की गुंजाइश भी रहती है। लिहाजा सरकार ने पूरी व्यवस्था पर नजर रखने को राज्य में  कृषि शिक्षा परिषद का गठन कर दिया है। 

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