बिज़नेस

दो साल में पांच गुना बढ़ी 50 हजार रुपये से कम के लोन की मांग

देश में युवा वर्ग अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए छोटी रकम के लोन ले रहे हैं। इसके चलते स्मॉल पर्सनल लोन (50 हजार रुपये ये कम) की मांग एक फिर तेजी से बढ़ी है। इस कारण पिछले दो वर्षों में स्मॉल पर्सनल लोन की मांग करीब पांच गुना बढ़ी है। सीआरआईएफ की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है।

गैर-वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और फिनटेक स्मॉल पर्सनल लोन मंजूर करने के लिए सॉफ्टवेयर का सहारा ले रही हैं और एनालिस्टिक्स आधार पर छोटे वैल्यू के लोन बांट रही है। मार्च 2020 से अब तक 50 फीसदी का उछाल छोटे साइज के लोन में आया है।

मिलेनियल्स औैर युवा वर्ग जमकर ले रहे लोन

रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे साइज के लोन की मांग बढ़ाने में मिलेनियल्स और युवा (18 से 30 साल) की अहम भूमिका है। बीते दो वर्षो में 41 फीसदी पर्सनल लोन युवाओं द्वारा लिया गया है। इससे दो वर्ष पहले इस आयु वर्ग की स्मॉल पर्सनल लोन में हिस्सेदारी 27 फीसदी थी। वहीं, तीन लाख से कम सालाना आय वाले लोगों द्वारा लोन की मांग में 69 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज वित्त वर्ष 2020 में आई है। इस तरह के लोन में एनबीएफसी की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। पर्सनल लोन सेगमेंट में 50,000 रुपये से कम लोन को स्मॉल टिकट पर्सनल लोन (एसटीपीएल) कहा जाता है।

एनबीएफसी की हिस्सेदारी बढ़ी

कोरोना संकट के बाद छोटे लोन देने में एनबीएफसी की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। बीते दो साल में एनबीएफसी की हिस्सेदारी इस सेगमेंट में दो गुनी हो गई है। वित्त वर्ष 2018 में स्मॉल पर्सनल लोन में एनबीएफसी की हिस्सेदारी 23 फीसदी थी जो वित्त वर्ष 2020 में बढ़कर 43 फीसदी पहुंच गई है। वहीं, सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी इस दौरान 40 फीसदी से घटकर 24 फीसदी रह गई है।

आसान शर्तों पर लोन से बढ़ी हिस्सेदारी

अपनी लोन प्रक्रिया में चुस्ती और फुर्ती के चलते ये फिनटेक कंपनियां बड़े बैंकों के वर्चस्व को चुनौती दे रही हैं। बैंकों में प्रमाणों और दस्तावेजों की काफी ज्यादा जरूर पड़ती है। फिनटेक कंपनियां डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए ग्राहकों की योग्यता निर्धारित करती हैं। फिनटेक कर्जदाताओं में मुख्यत: स्टार्टअप शामिल हैं। इन्होंने 65 फीसदी कर्ज 30 साल से कम उम्र के ग्राहकों को दिए हैं। इसके चलते फिनटेक कंपनियों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।

कर्ज पर तय राशि वसूलती हैं कंपनियां

बैंक या एनबीएफसी आपको कर्ज देती हैं तो उनका ब्याज फीसदी के रूप में तय होता है यानी 10 फीसदी या अन्य तय फीसदी। लेकिन फिनटेक हर कर्ज पर एक तय राशि ब्याज के रूप में लेती हैं जो ज्यादा महंगा होता है। एक कंपनी 15 हजार रुपये कर्ज 15 दिन के लिए देती है और 16वें दिन 15,125 रुपये ब्याज समेत वसूलती है। फीसदी के रूप में देखें तो यह 0.5 फीसदी प्रति दिन और 180 फीसदी सालाना हुआ जो बेहद ऊंचा है।

Share This Post