समस्तीपुर

नाजिरगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग तेज

समस्तीपुर । समस्तीपुर-बरौनी रेलखंड के बीच उजियारपुर प्रखंड के नाजिरपुर पंचायत स्थित रेलवे स्टेशन का नाम नाजिरगंज बदलने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। जिस नाम से स्टेशन चल रहा है, वह गांव प्रखंड तो क्या समूचे दरभंगा कमिश्नरी क्षेत्र में नहीं है। स्थानीय लोगों की मानें तो स्टेशन का पुराना नाम चांदचौर था। जिसे बाद में बदलकर नाजिरगंज बना दिया गया। आज से लगभग चालीस वर्ष पूर्व चांदचौर स्टेशन के नाम से टिकट भी कटता था। बताया जाता है कि नाजिरपुर पंचायत के लोगों ने वर्षों पहले चांदचौर नाम पर एतराज जताते हुए स्टेशन का नाम नाजिरपुर रखने की मांग की थी। जबकि चांदचौर के लोग नाम बदलने का विरोध कर रहे थे। यह विवाद काफी गहरा गया था। जिसके कारण दोनों नाम को हटाकर एक अलग ढ़ंग से नाजिरगंज नाम रखकर रेल प्रशासन ने विवाद सुलझा दिया था। मामला पूरी तरह शांत पड़ गया था। परंतु एक अलग नाम देना लोगों को अभी भी खटक रहा है।

इस स्टेशन का नाम नाजिरपुर चांदचौर रखने की मांग उठने लगी है। हालांकि अब नाजिरगंज नामाकरण से संबंधित रेलवे के किसी भी दफ्तर में कोई फाइल मौजूद नहीं है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब चांदचौर निवासी एवं धनबाद कोर्ट के अधिवक्ता सह आरटीआई कार्यकर्ता रामपुनीत चौधरी ने 30 नवंबर 2016 को केंद्रीय लोक सूचना पदाधिकारी रेल भवन नई दिल्ली से इस संबंध में ब्योरा मांगा। अधिवक्ता ने महाप्रबंधक पूर्व मध्य रेल हाजीपुर, उप सचिव गृह विभाग बिहार के यहां भी कई बार पत्राचार किया है।

पिछले पांच वर्षों में विभिन्न पत्राचार करने के बाद यह तथ्य सामने आया है कि स्टेशन परिसर नाजिरपुर गांव में पड़ता है। परंतु इसके चारों तरफ से चांदचौर राजस्व गांव घेरे हुए है। परंतु नाजिरगंज गांव इलाके में कहीं नहीं है। जिससे स्टेशन का नाम पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। अधिवक्ता रामपुनीत चौधरी के अलावा डॉ मुकेश कुमार राय, राजकुमार चौरसिया, सरोज सिंह, सुनील कुमार सिंह, अभिजीत राय, रामबाबू सिंह, मनोज सिंह, पिटू चौधरी, चंदन चौरसिया, पिटू कुमार, रामायण राय, दीपक राय, रामप्रसाद सिंह, अभिषेक कुमार, विपिन कुमार आदि ने रेल प्रशासन से नाजिरगंज स्टेशन का नाम नाजिरपुर चांदचौर करने की मांग की है।

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