Pitru Paksh 2020
धर्म

Pitru Paksha 2020: क्या आप जानते हैं कि पितृपक्ष में श्राद्ध क्यों किया जाता है?

भारतीय परम्परा में पूर्वजों को नमन करना, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना, साथ ही अगली पीढ़ी को पूर्वजों से अवगत कराने की व्यवस्था को ही श्राद्ध कहा गया है। श्राद्ध पक्ष का ध्येय अपने पूर्वजों के प्रति आदर है।

श्राद्ध, श्रद्धा पूर्वक किए गए अच्छे कर्म हैं, जो पूर्वजों की स्मृति में किए जाते हैं। यह जीवित लोगों को भी पुन: स्मरण कराते हैं कि जीवन नश्वर है। विचार करें, पहले कितने ही लोग यहां रहते थे, जो अब सार्वभौमिक चेतना के साथ एक हो गए हैं। यह शरीर (पिंड) स्थूल जगत (ब्रह्मांड) का एक हिस्सा है। जब आत्मा विदा हो जाती है, तो वह उस सर्वव्यापी चेतना के साथ एक हो जाती है, जो निराकार व अगोचर है। भारत में मृतकों के लिए ‘तिल तर्पणम’ नामक एक विधि की जाती है। अल्प मात्रा में तिल लिए जाते हैं और जल के साथ आत्मा को तृप्ति प्राप्त करने के लिए समर्पित किए जाते हैं। 
तिल का उपयोग यह बताने के लिए किया जाता है कि हम कितने लघु हैं। इस ब्रह्मांड में हमारा क्या महत्व है? न के बराबर ही, एक छोटे-से धूल के कण की तरह! तिल बाहर से काला और भीतर से श्वेत होता है। यह हमें आंतरिक पवित्रता को बनाए रखने की याद दिलाता है। यदि तिल को रगड़ कर स्वच्छ किया जाए, तो वह बाहर से भी श्वेत हो जाएगा। अंतत: यदि हम बाहरी आवरण गिरा देते हैं, तो हर कोई अंदर से शुद्ध होता है।

जब तिल अर्पित किए जाते हैं, तो श्राद्धकर्ता अपने पूर्वजों से सभी इच्छाएं, तृष्णा और बंधन को त्यागने और आगे बढ़ने के लिए कहते हैं, क्योंकि वे और उनकी संतानें उनकी इच्छाओं को पूरा करने के लिए यहां हैं। आप दो व्यक्तियों से जन्मते हैं, उनका स्रोत चार लोग होते हैं और यदि हम और पीछे जाते रहते हैं, तो अनंत लोग होंगे, जो यहां आपकी उपस्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। फिर आपका स्रोत क्या है? एक या अनंत? इसलिए पितरों की परंपरा को याद रखना और उन्हें धन्यवाद देना महत्वपूर्ण है, जो आपके अस्तित्व का कारण हैं। ऐसा ही दिन है महालया अमावस्या, जो महा नवरात्रि से ठीक पहले (इस बार दो आश्विन होने के कारण इसमें एक माह का अंतर होगा) पड़ता है। 

नवरात्रि के दौरान अनंत रूपों और अनंत गुणों में दिव्य मां की पूजा की जाती है। लेकिन देवी की पूजा करने से पहले हमें पितरों के आशीर्वाद की आवश्यकता होती है। उन्हें तर्पणम अर्पित किया जाता है। यह परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है। तर्पण करने से समाज और व्यक्तियों को जो लाभ होता है, वह अवर्णनीय है। मंत्रों का प्रभाव अचिन्त्य है- जो विचार के पूर्वावलोकन से परे है। मंत्रों के कारण होने वाले कंपन को केवल अनुभव किया जा सकता है।

दुनिया भर की परंपराओं में दिवंगत लोगों को याद करने की प्रथाएं हैं। सिंगापुर में यह एक उत्सव की तरह है, एक सार्वजनिक अवकाश। दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों में भी दिवंगत लोगों को याद करने के लिए समारोह होते हैं। ईसाई परंपरा में ‘ऑल सोल्स डे’ को इसी उद्देश्य से मनाया जाता है।

जीवन का रहस्य, परमात्मा को सभी चीजों के कर्ता और नियंत्रक के रूप में मानना और स्वयं को कर्तापन के कर्म से मुक्त करना है, जो जन्म व मृत्यु के चक्र का कारण है। जब आप देवत्व में विश्वास रखते हैं, तो भय व इच्छा से मुक्त हो जाते हैं और जब समय आता है, तो यहां से आगे तक की यात्रा स्वत: और सरल हो जाती है।

Share This Post
Kunal Raj
Editor-In-Chief l Software Engineer l Digital Marketer