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‘ड्रैगन’ पर पलटवार! बदल जाएगा ई-कॉमर्स का बाजार, अमेजन-फ्लिपकार्ट पर दिखेगा ‘मेड इन इंडिया’

चीन की हरकत के बाद पूरे देश में चीन के खिलाफ गुस्से का माहौल है. चीनी सामान के बहिष्कार की मांग जोर पकड़ रही है. सरकार भी चीन से इंपोर्ट कम करने के लिए बड़ी योजना बना रही है. इंपोर्ट होने वाले कई सामानों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने पर विचार कर रही है. उधर दूसरी तरफ ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भी पॉलिसी लाने पर विचार किया जा रहा है. जल्द ही ई-कॉमर्स के लिए नई पॉलिसी का ऐलान हो सकता है. 

आएगी नई ई-कॉमर्स पॉलिसी
अगले कुछ महीनों में नई ई-कॉमर्स पॉलिसी आने वाली है. ई-कॉमर्स पॉलिसी के ड्राफ्ट में मिले सुझावों के बाद अब ग्राहकों के लिए ‘मेड इन इंडिया’ प्रोडक्ट को पहचान करना आसान होगा. नई पॉलिसी के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को प्रोडक्ट्स की मेकिंग के बारे में जानकारी देनी होगी. उन्हें ग्राहक को प्रोडक्ट के बारे में बताना होगा कि उनका प्रोडक्ट मेड इन इंडिया है या नहीं. खरीदारों को प्रोडक्ट्स से जुड़ी पूरी जानकारी मिलेगी और प्रोडक्ट्स की प्रामाणिकता की जिम्मेदारी सैलर की होगी. बिना सैलर की गारंटी वाला प्रोडक्ट ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर नहीं बिकेगा. 

आत्मनिर्भर भारत मिशन को मिलेगी मदद
जानकारों का मानना है कि ई-कॉमर्स के लिए नई पॉलिसी सकारात्मक कदम होगा. इससे एक तरफ चीनी सामान का चलन कम होगा, वहीं दूसरी तरफ आत्मनिर्भर भारत मिशन को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही ग्राहकों के पास स्थानीय सामान खरीदने का विकल्प रहेगा. बता दें, डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) ने पिछले साल नेशनल ई-कॉमर्स पॉलिसी को तैयार किया था.

नई ई-कॉमर्स पॉलिसी में क्या होंगे नियम

  • ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर प्रोडक्ट की पूरी डिटेल जरूरी होगी. 
  • प्रोडक्ट की प्रामाणिकता सैलर की जिम्मेदारी होगी.
  • प्रोडक्ट की गारंटी सैलर से नहीं होने पर प्लेटफार्म पर प्रोडक्ट नहीं बिकेगा.
  • सैलर से जुड़ी डिटेल भी प्लेटफार्म पर जरूरी होगी. इनमें पता, टेलीफोन नंबर दर्ज करने होंगे.
  • खरीददारों को प्रोडक्ट से जुड़ी पूरी जानकारी मिलेगी.
  • सरकार के आत्मनिर्भर मिशन को बढ़ावा मिलेगा.
  • प्रोडक्ट से जुड़ी गलत जानकारी पर पेनाल्टी का भी प्रावधान.
  • स्वदेशी प्रोडक्ट्स की पहचान करना आसान होगा.

डिस्काउंट को लेकर भी नियम

  • नई पॉलिसी में कंपनी को डिस्काउंट से जुड़ी जानकारी देनी होगी.
  • डिस्काउंट विक्रेता या ब्रांड दे रहे हैं, न कि ई-कॉमर्स पोर्टल.
  • प्रोडक्ट पर अधिकतम डिस्काउंट की सीमा तय करने वाले नियम.
  • ई-कॉमर्स पोर्टल डिस्काउंट नहीं दे ये सुनिश्चित किया जाएगा.
  • ऑडिटरों को डिस्काउंट का सालाना ऑडिट कराना अनिवार्य होगा.

क्या है मौजूदा नियम?

  • विक्रेताओं पर ई-कॉमर्स कंपनियां दबाव नहीं डाल सकतीं.
  • विक्रेता अपना माल कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेच सकेगा.
  • किसी माल के लिए एक्सक्लूसिव प्लेटफॉर्म नहीं होगा.
  • कंपनियां अपना या सब्सिडियरीज का माल नहीं बेच सकेंगी.
  • ग्राहकों की संतुष्टि के लिए विक्रेता भी जिम्मेदार होगा.
  • दाम घटाने के लिए विक्रेता पर दबाव नहीं डाला जा सकता.
  • कंपनियों को कैश बैक देने में पारदर्शिता बरतनी होगी.
  • कंपनियां विक्रेताओं के साथ भेदभाव नहीं कर सकती.
  • विक्रेताओं को प्लेटफॉर्म को लेकर मजबूर नहीं कर सकतीं.
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