समस्तीपुर

समस्तीपुर में सादगी के बीच मनाया गया त्याग और इबादत का पर्व ईद-उल-अजहा

समस्तीपुर । त्याग और इबादत का पर्व ईद-उल-अजहा (बकरीद) शनिवार को अकीदत के साथ मनाया गया। लॉकडाउन की पाबंदियों के बीच अपने अपने घरों में लोगों ने नमाज अदा की और अल्लाह ताला की रजा के लिए कुर्बानी दी। देर शाम तक मुबारकबाद का सिलसिला चलता रहा। इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से ईदगाहों और मस्जिदों में सामूहिक नमाज अदा नहीं की गई है। जिसका अफसोस अहले इमान के दिलों में है। हलांकि, सादगी के बीच लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। जबाल से पहले शारीरिक दूरी बनाकर अपने अपने घरों में बकरीद की नमाज अदा करते हुए लोगों ने अल्लाह का शुक्र दुआ किया। जबकि मस्जिदों में चार से पांच लोग ही नमाज अता करते हुए नजर आए। नूरी मस्जिद के इमाम मौलाना मोतीउर्ररहमान ने बताया कि ईद-उल-अजहा के दिन अल्लाह की राह में कुर्बानी करना सुन्नत है। हजरत इब्राहिम की यह सुन्नत हर उस मुसलमान को माननी होती है, जिसकी हैसियत कुर्बानी करने की है। उल्लाह उन्हीं की कुर्बानी कबूल करता है, जो सही ढंग से कुर्बानी के सभी अरकानों को पूरा करते हैं।

पुराने कपड़ों से चला काम

बकरीद के दिन लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिदों में नमाज अदा करने जाते थे। राजखंड के मो. कमाल ने बताया कि इस बार लॉकडाउन की वजह से लोगों ने पुराने कपड़े के साथ बकरीद मनाया। बकरीद मिलन समारोह का भी आयोजन नहीं किया गया। वहीं कोरोना वायरस के संक्रमण ने बकरीद का उल्लास फीका-फीका रहा।

सोशल मीडिया पर दी मुबारक बाद

शारीरिक दूरी का पालन करते हुए बकरीद की मुबारकबाद दिया और पुरानी गलतियों को भुलाया। बहुत सारे रिश्तेदारों के घर भी नहीं जा सके। इस बार की बकरीद में लोग गिले-शिकवे को भुलाने के लिए मोबाइल का सहारा लिया। लॉकडाउन की वजह से सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे को बकरीद की मुबारकबाद दी। कई लोग घर नहीं लौट सके। इसके लिए वीडियो कॉल के माध्यम से स्वजनों व दोस्तों को बधाई दी।

सुरक्षा के सख्त इंतजाम

बकरीद की सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए। सुरक्षा बल लगातार गश्त लगा रहे थे। मस्जिदों व ईदगाहों के पास विशेष चौकसी बरती गई। चौक-चौराहों पर भी पुलिस की तैनाती की गई थी। प्रशासन व उलेमाओं की अपील का माकूल असर बकरीद के त्योहार पर दिखा।

Share This Post