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सावधान! बाजार में 100 और 500 रुपये के जाली नोटों की भरमार, 31.3 फीसद की वृद्धि

भारतीय अर्थव्यवस्था में एक बार फिर से जाली नोटों का चलन तेजी से बढ़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 500 रुपये के के जाली नोटों में 31.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जो सबसे अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19 में 21865 नकली 500 के नोट पकड़े गए थे, वहीं 2019-20 में पकड़े गए 30,054 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2020-21 में 39,462 नोट (नई और पुरानी दोनों श्रृंखला शामिल) पकड़े गए हैं।  इस तरह 500 रुपये के जाली नोटों की संख्या में 31.3 फीसदी की वृद्धि हुई है।

100 रुपये के नकली नोटों का हिस्सा सबसे अधिक

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में 5.45 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली नोट पकड़े गए हैं। इसमें 100 रुपये के नकली नोटों का हिस्सा सबसे अधिक है। पिछले वर्ष 100 रुपये के 110736 नकली नोट पकड़े गए। मूल्य के हिसाब से यह रकम 11073600 रुपये है। वित्त वर्ष 2018-19 में 221218 नकली 100 के नोट पकड़े गए थे, वहीं 2019-20 में 168739 नकली 100 रुपये के नोट पकड़े गए थे।

अन्य नोटों की बात करें, तो वित्तीय वर्ष 2020-21 में दो और पांच रुपये के नौ नोट पकड़े गए हैं। जबकि इससे पिछले वित्तीय वर्ष में ऐसे 22 नोट पकड़े गए थे।  वित्त वर्ष 2020-21 में कुल 2,08,625 नकली नोट पकड़े गए हैं। इनमें से (करीब चार फीसदी) 8107 जाली नोट केद्र ने पकड़े हैं, जबकि अन्य बैंकों ने (करीब 96 फीसदी) 2,00,518 जाली नोट पकड़े हैं। इन जाली नोटों में सबसे ज्यादा संख्या 100 रुपये के नोटों की है। इसके बाद क्रमश: 500 रुपये, 50 रुपये, 200 रुपये और 2000 रुपये के नोटों की।

नोटबंदी के बाद फिर से बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने 2016 में 500 रुपये औैर 1000 रुपये के नोट का चलन पूरी तरह से बंद करने की घोषणा की थी। इसका मकसद देश में ब्लैक मनी पर रोक औैर जाली नोट खत्म करना था। इसके बाद जाली नोट का चलन पूरी तरह से खत्म हो गया लेकिन एक बार फिर से जाली नोट का जाल तेजी से फैला है। जाली नोट को लेकर कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां बताती रहती हैं। दिल्ली समेत देश के कई शहरों में जाली नोटों के साथ आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। आरबीआई की ओर से असली और नकली करेंसी की पहचान के लिए कई सारे तरीके बताता रहता है।

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