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भारत सरकार ने जारी किया फरमान, इस दिन बंद होगा फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम

वॉट्सऐप की ओर से नए नियम को प्राइवेसी के उल्लंघन करने वाला बताने पर केंद्र सरकार ने जवाब दिया है। आईटी मिनिस्ट्री ने कहा है कि भारत सरकार निजता के अधिकार का सम्मान करती है और उसके उल्लंघन का कोई इरादा नहीं है। नए नियमों के मुताबिक वॉट्सऐप को सिर्फ उस व्यक्ति के बारे में ही बताना होगा, जिसने किसी एक निश्चित संदेश को आगे बढ़ाया होगा। आईटी मंत्रालय ने कहा कि ऐसा तभी होगा, जब किसी संदेश से संभावित हिंसा और नफरत को रोकने की जरूरत हो। किसी यौन अपराध के मामले में या फिर गंभीर मामले में ही ऐसा किया जाएगा।

यही नहीं वॉट्सऐप की प्राइवेसी पर हमला बोलते हुए आईटी मिनिस्ट्री ने कहा कि एक तरफ वॉट्सऐप अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में यूजर्स से कह रहा है कि उसकी ओर से सारा डेटा पेरेंट कंपनी फेसबुक को शेयर किया जाएगा। इस प्राइवेसी पॉलिसी को वह यूजर्स के लिए अनिवार्य बनाने की बात कर रहा है। वहीं कानून व्यवस्था को बनाए रखने और फेक न्यूज पर लगाम कसने के लिए जरूरी नियम को रोकने के लिए वह हरसंभव कोशिश कर रहा है। बता दें कि वॉट्सऐप की ओर से आईटी मिनिस्ट्री की नई गाइडलाइंस के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया गया है। वॉट्सऐप ने अदालत में कहा है कि किसी यूजर का खुलासा करना प्राइवेसी के नियमों का उल्लंघन होगा।

फेसबुक के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप ने नए सोशल मीडिया से जुड़े नए नियमों पर सरकार के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है, जिसके तहत संदेश सेवाओं के लिए यह पता लगाना जरूरी है कि किसी संदेश की शुरुआत किसने की। वॉट्सऐप के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि कंपनी ने हाल ही में लागू किए गए आईटी नियमों के खिलाफ 25 मई को दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वॉट्सऐप के एक प्रवक्ता ने कहा कि मैसेजिंग ऐप के लिए चैट पर निगाह रखने की आवश्यकता, उन्हें वॉट्सऐप पर भेजे गए हर एक संदेश का फिंगरप्रिंट रखने के लिए कहने के बराबर है। प्रवक्ता ने कहा कि यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को तोड़ देगा और लोगों के निजता के अधिकार को कमजोर करेगा।

नए सूचना प्रौद्योगिकी नियम बुधवार 26 मई से प्रभाव में आएंगे और इनकी घोषणा 25 फरवरी को की गई थी। इस नए नियम के तहत ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसी बड़े सोशल मीडिया मंचों को अतिरिक्त उपाय करने की जरूरत होगी। इसमें मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल अधिकारी और शिकायत अधिकारी की नियुक्ति आदि शामिल हैं। प्रमुख सोशल मीडिया मंचों को नए नियमों के अनुपालन के लिए 3 महीने का समय दिया गया था। इस श्रेणी में उन मंचों को रखा जाता है, जिनके पंजीकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या 50 लाख से अधिक है।

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