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जहाज के फंसने से स्वेज नहर में लगा भीषण ट्रैफिक जाम, भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

सड़कों पर ट्रैफिक जाम की खबरें तो आपने अक्सर पढ़ी और देखी होगी, लेकिन नहर में ट्रैफिक जाम की खबर शायद पहली बार सुनेंगे। जी हां, स्वेज नहर में विशालकाय कार्गो शिप के फंस जाने से जाम लग गया है। इस जाम का भारत के बाजार पर भी असर पड़ सकता है। ऐसा माना जा रहा है इससे कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ंगे, क्योंकि यूरोप को एशिया से जोड़ने वाली स्वेज नहर के रास्ते तकरीबन दस प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार होता है।

भारत में टर्की, रूस और लीबिया से क्रूड ऑयल स्वेज नहर के रास्ते ही आते हैं। मंगलवार को नहर के जाम की खबर फैलते ही क्रूड ऑयल के दाम बढ़ गए। भारत में इसकी कीमतों में पांच प्रतिशत का इजाफा हो चुका है। आने वाले दिनों में पेट्रोल पंपों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। आपको बता दें की भारत स्वेज नहर के रास्ते से पांच लाख बैरल तेल विभिन्न देशों से मंगवाता है।

मंगलवार की सुबह हवा के बवंडर ने कंटेरन शिप को घुमा दिया। इसे सीधा करने और वहां से निकालने में कई दिन लग सकते हैं। कंटेनर शिप फंस जाने से नहर में 100 से ज्यादा शिप फंसे हुए हैं, जो कि नहर के खुलने का इंतजार कर रहे हैं। शिप को निकालने की कोशिश की जा रही है। यह कंटेनर शिप 400 मीटर लंबा और 59 मीटर चौड़ा है, जो कि चीन से सामन लेकर निकला था। 

इजिप्ट का यह स्वेज नहर मानव निर्मित नहर है, जो कि एशिया और यूरोप को जोड़ती है। स्वेज नहर की लंबाई 193.3 किलोमीटर है। दुनिया का 12 फीसदी व्यापार और 10 फीसदी कच्चे तेल का व्यापार स्वेज नहर से होता है। 

स्वेज नहर पर 1956 तक ब्रिटेन का अधिकार था। भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है। पिछले साल 19,000 हजार शिप स्वेज नहर के रास्ते से गुजरे थे। यह युरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा रूट है। इस रास्ते से होकर रोजाना 51 जहाज गुजरते हैं। अगर इसे जल्दी नहीं खोला गया तो जहाजों को करीब 9000 किमी की अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ेगी।

स्वेज नहर का वैश्विक व्यापार पर काफी असर पड़ता है। इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इसको लेकर युद्ध तक हो चुके हैं। इस नहर को कई बार बंद भी किया जा चुका है।

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