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फोर्ड के फैसले का भारत में कारोबारी माहौल पर पड़ेगा कैसा असर?

अमेरिका की प्रमुख वाहन विनिर्माता कंपनी फोर्ड द्वारा भारत में कारों का उत्पादन बंद करने की अचानक की गई घोषणा के एक दिन बाद शुक्रवार को एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने कहा कि यह निर्णय देश के कारोबारी माहौल को परिलक्षित नहीं करता है, बल्कि यह परिचालन संबंधी मुद्दों से जुड़ा मामला है। सूत्र, सरकार में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं जिन्होंने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि जापानी और कोरियाई कार विनिर्माताओं से प्रतिस्पर्धा के कारण अमेरिकी कंपने ने उत्पादन बंद करने का निर्णय किया है। फोर्ड मोटर कंपनी ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि वह भारत में अपने दो विनिर्माण संयंत्रों को बंद करेगी और केवल आयातित वाहनों की ही बिक्री करेगी।

फोर्ड, जिसने अपने चेन्नई (तमिलनाडु) और साणंद (गुजरात) संयंत्रों में लगभग 2.5 अरब डॉलर का निवेश किया है, इन संयंत्रों से उत्पादित इकोस्पोर्ट, फिगो और एस्पायर जैसे वाहनों की बिक्री बंद हो जाएगी। सरकारी सूत्र ने कहा, ”भारत के आटोमोबाइल क्षेत्र में विकास की कहानी जारी है और घरेलू तथा निर्यात दोनों बाजारों में यह आगे बढ़ रही है। फोर्ड का कारोबार से बाहर निकलना संभावित परिचालन संबंधी दिक्कतों की वजह से हो सकता है और यह किसी भी तरह से भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र या भारत में कारोबारी माहौल को प्रतिबिंबित नहीं करता है। जनरल मोटर्स के बाद भारत में प्लांट बंद करने वाली फोर्ड दूसरी अमेरिकी वाहन कंपनी है।

वर्ष 2017 में, जनरल मोटर्स ने कहा था कि वह भारत में वाहनों की बिक्री बंद कर देगी क्योंकि दो दशकों से अधिक समय तक संघर्ष करने के बाद भी उसके कारोबार में बदलाव नहीं आया है। चालू वित्तवर्ष में अप्रैल-अगस्त के दौरान यात्री वाहनों की कुल बिक्री 11.42 लाख वाहनों की हुई, जबकि वर्ष 2019-20 की समान अवधि में यह बिक्री संख्या 10.91 लाख थी।

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