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फास्टैग नहीं लगवाया तो 1 जनवरी से देना होगा दोगुना टोल, नकदी के लिए होगा मात्र एक काउंटर

राष्ट्रीय उच्च पथों (एनएच) पर सफर करने से पहले अपनी गाड़ियों में फास्टैग लगवा लें वरना एक जनवरी से तय टोल से दोगुना पैसा लगेगा। केंद्र सरकार की ओर से जारी यह आदेश एक जनवरी से लागू हो जाएगा। आदेश के अनुसार अगर फास्टैग नहीं लगवाए तो नकदी देने पर दोगुना टोल चुकाना होगा। बिहार में अभी 70 फीसदी लोग ही अपनी गाड़ियों में फास्टैग लगवा सके हैं।

एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार आगामी जनवरी से बिहार के सभी टोल प्लाजा पर मात्र एक काउंटर ही नकदी के लिए होंगे। बाकी काउंटर उन गाड़ियों के लिए होगा, जिसमें फास्टैग लगे हुए हैं। जिन लोगों ने अपनी गाड़ियों में फास्टैग नहीं लगवाए हैं उन्हें नकदी देकर टोल प्लाजा से गुजरना होगा। चूंकि नकदी के लिए एक ही काउंटर होगा। ऐसे में जाम की समस्या भी होगी। साथ ही तय राशि से दोगुना पैसा भी देना पड़ेगा। वहीं फास्टैग लगी गाड़ियों को टोल पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में लगे सेंसर से फास्टैग लगी गाड़ियों से टोल की वसूली स्वत: हो जाएगी।
 
ऑलाइन खरीद की सुविधा
फास्टैग की खरीदारी के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। घर बैठे पेटीएम या अमेजन से ही इसकी खरीदारी की जा सकती है। इसके अलावा बिहार के सभी टोल प्लाजा केंद्रों पर ही फास्टैग के  लिए विक्रय केंद्र खुले हुए हैं। साथ ही एसबीआई सहित अन्य बैंकों के माध्यम से भी इसकी खरीदारी की जा सकती है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम या हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के पेट्रोल पंपों पर भी फास्टैग उपलब्ध है। इसके अलावा एनएचएआई की माई फास्ट ऐप से भी इसकी खरीदारी की जा सकती है।

चाहिए ये कागजात 
फास्टैग की खरीदारी के लिए गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, ऑनर बुक, केवाईसी में पहचान व पत्राचार के कागजात चाहिए। खरीदारी के बाद चेक, क्रडिट या डेबिट कार्ड, आरटीजीएस के जरिए ऑनलाइन रिचार्ज किया जा सकता है। एक बार में कम से कम 100 रुपए और अधिकतम एक लाख से इसे रिचार्ज कराया जा सकता है। बैंक के बचत खाता से भी फास्ट टैग को जोड़ा जा सकता है। पैसा कम होने पर उसका एसएमएस आएगा ताकि उसे रिचार्ज करा सकें। फास्टैग से जुड़ने का शुल्क 200 रुपए है। अलग-अलग गाड़ी के अनुसार कुछ सिक्यूरिटी मनी भी देनी होगी जो खाता बंद करते समय वापस कर दी जाएगी। 

ऐसे करता है काम 
टोल प्लाजा से गुजरते ही टोल टैक्स पर लगे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ऐसी गाड़ियों की पहचान कर लेते हैं। संबंधित गाड़ी में लगे फास्टैग को स्कैन करते ही टोल प्लाजा पर लगा गेट खुल जाएगा। गाड़ी मालिक बेरोकटोक आगे जा सकेंगे। टोल पर निर्धारित राशि फास्टैग में उपलब्ध राशि से कट जाएगी। बिहार के सभी टोल प्लाजा पर इसका उपयोग हो रहा है। 

फास्टैग होने पर भी परेशानी
टोल प्लाजा पर कभी-कभार फास्टैग होने पर भी परेशानी होती है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में खराबी के कारण वह फास्टैग को स्कैन नहीं कर पाता है। ऐसे में गेट नहीं खुलने पर नकदी के रूप में लोगों को दोगुना शुल्क देना पड़ता है। एनएचएआई के अधिकारी भी इस खराबी को स्वीकार करते हैं। एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी चंदन वत्स के अनुसार इस तरह की यदा-कदा शिकायतें सामने आती है। शुरुआती काल में कुछ समस्या हर प्रणाली में होती है। आने वाले दिनों में सभी समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा।

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