बिहार

ये था उत्तर बिहार का सबसे बड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन अशोक सम्राट , सबसे पहले इसके पास आया था AK 47

बिहार के मुजफ्फरपुर को अंडरवर्ल्ड के दुनिया का मिनी मुंबई कहा जाता था। इस शहर में एक नामचीन कॉलेज है लंगट सिंह कॉलेज। अपने यूनिवर्सिटी में कॉलेज में स्टूडेंट को लीडर बनते देखा होगा और सुना होगा। लेकिन यह कॉलेज थोड़ा अलग है यहां से स्टूडेंट अंडरवर्ल्ड में जाने का ख्वाब देखते थे। इस कॉलेज के इतिहास में सैकड़ों ला से दफन है जो वर्चस्व की लड़ाई में गिरी थी। यहां के छात्रों ने अंडरवर्ल्ड पर राज किया है।

1970 80 के दशक में मुजफ्फरपुर के कॉलेज कैंपस में जातीय और क्षेत्रीय वर्चस्व कायम करने की होड़ सी लगी हुई थी। यह और आगे भी जारी रही थी।बिहार के बेगूसराय और मुंगेर से आए लड़के यहां के स्थानीय लड़कों से आए दिन भिड़ते रहते थे। भूमिहार और राजपूत दोनों आमने सामने हुआ करते थे। स्थानीय लोगों की माने तो कहते हैं 1971 और 72 में बेगूसराय के कम्युनिस्ट नेता सुखदेव सिंह के पुत्र वीरेंद्र सिंह ने कॉलेज के इतिहास में पहली बार अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए कैंपस में बम और गोलियां चलवाई थी।

इसके बाद यह बम और गोली का संघर्ष लगातार जारी रहा। सन 1978 में मूछों नरेश नाम के एक लड़के की हत्या हो गई।

मुथु नरेश कॉलेज का दबंग छात्र था। उसकी हत्या से कॉलेज में तनाव बढ़ गया। कई दिनों तक संघर्ष लगातार जारी रहा। मोछू नरेश के बाद मिनी नरेश ने मोर्चा संभाला। मिनी नरेश ने पूरे कॉलेज केंपस पर अपना वर्चस्व कायम किया।बच्चे सभी ऐसा कि कॉलेज केंपस के विस्तार का ठेका भीम मिनी नरेश को मिलने लगा।1983 में मिनी नरेश ने एक ठेकेदार रामानंद सिंह की हत्या कर दी। इसी साल चंदेश्वर सिंह ने भी शहर के छाता चौक पर विरेर सिंह की खुलेआम हत्या कर दी। मिनी नरेश के ऊपर एक बाहुबली का हाथ था वह बाहुबली कोई और नहीं अशोक सम्राट था। अशोक सम्राट कैंपस के बाहर से कैंपस और मुजफ्फरपुर अंडरवर्ल्ड दोनों जगह मैनेज कर रहा था।


उस समय वहां के अंडरवर्ल्ड के दो मुख्य किरदार थे एक अशोक सम्राट और दूसरा लंगट सिंह महाविद्यालय से निकला छात्र छोटन शुक्ला। वैशाली का रहने वाला एक साधारण परिवार का लड़का 12वीं में पिता की हत्या के बाद बंदूक उठाने वाले छोटन शुक्ला ने बहुत कम उम्र में ही अंडरवर्ल्ड में अपना जोर कायम कर लिया था।छोटन शुक्ला तिरहुत प्रमंडल पर ठेकेदारी के इकलौते बादशाह अशोक सम्राट के सामने था। लेकिन बीच में एक और नाम बिहार के अपराध जगत में काफी तेजी से उभर रहा था चंदेश्वर सिंह अशोक सम्राट के ऊपर हेमंत साहू और चंदेश्वर सिंह के ऊपर रघुनाथ पांडे का राजनीतिक हाथ था। रघुनाथ पांडे उस समय उत्तर बिहार का सबसे दबंग नेता माना जाता था।

राजनीतिक संरक्षण प्राप्त इन सभी डॉन ने ठेकेदारी में अपना जो आजमाना शुरू किया। लाशों के ढेर और रोज मुजफ्फरपुर में बम और गोलियों की आवाजें सुनने को आती थी। लेकिन खेल तब दिख रहा जब अशोक सम्राट ने चंदेश्वर सिंह के बेटे की हत्या उसके तिलक के दिन ही कर दिया।बदले की आग में जलता चंदेश्वर सिंह ने अशोक सम्राट का सबसे मजबूत साथ मिनी नरेश को काट दिया। फरवरी 1989 को सरस्वती पूजा के दिन पूरा कैंपस गोलियों की तर तरा हट से गूंज उठा। चंदेश्वर सिंह और उसके लोगों ने पूरे कैंपस को घेर लिया और मिनी नरेश की हत्या कर दी। इस हत्या में छोटन शुक्ला का भी नाम सामने आया।

मिनी नरेश की हत्या से अशोक सम्राट तिल मिलाया हुआ था। वह चंदेश्वर सिंह और छोटन शुक्ला के पीछे हाथ धोकर पर गया था।इसके बाद 1990 में बिहार में एक ऐसा कांड हुआ जो बिहार के आपराधिक इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था।जिस तरह से चंदेश्वर सिंह ने सरस्वती पूजा के दिन मिनी नरेश की हत्या की थी ठीक उसी सरस्वती पूजा के ही दिन शहर के छाता चौक पर दिनदहाड़े चंदेश्वर सिंह की हत्या कर दी गई। इस हत्या में AK 47 का उपयोग हुआ था। चंदेश्वर सिंह को करीब 40 गोलियां मारी गई थी। यह बिहार के अपराधिक इतिहास में पहली बार था जब कोई अपराधी AK 47 का उपयोग कर रहा था। पूरा बिहार दिल दहला देने वाली घटना से कांप उठा था। पुलिस महकमे में भी अफरा-तफरी मच गई थी।

पूरे उत्तर बिहार में अशोक सम्राट का अपराध जगत में बजता था डंका

इस हत्याकांड के बाद अशोक सम्राट उत्तर बिहार का बादशाह हो गया था। घटना के बाद कई लाशें गिरी। छोटन शुक्ला और अशोक सम्राट आमने-सामने थे। दोनों तरफ से हर दूसरे दिन किसी ना किसी की लाश गिरती थी। मामला चलता रहा, ठेकेदारी और वर्चस्व की लड़ाई जारी थी। अशोक सम्राट बेगूसराय से मुजफ्फरपुर मोकामा और पटना हर जगह अपना पांव पसार चुका था।अशोक सम्राट का बढ़ता कद पुलिस और राजनीति दोनों के लिए खतरे की घंटी थी।

उस समय प्रदेश में लालू यादव की सरकार थी। लालू यादव के खिलाफ कहीं बाहुबलियों ने मोर्चा खोल दिया था। कहते हैं इस मोर्चे का सूत्रधार अशोक सम्राट ही था।उसने ही सबको लालू के खिलाफ चुनाव लड़ने को उकसाना शुरू किया था। सत्ता को इस बात की भनक थी। 1995 के चुनाव से ठीक पहले हाजीपुर में पुलिस और अशोक सम्राट गैंग के बीच मुठभेड़ हुई। यह मुठभेड़ 4 घंटे से ऊपर चला। एनकाउंटर में अशोक सम्राट मारा गया। यह एनकाउंटर बिहार में ऐतिहासिक एनकाउंटर है।

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