समस्तीपुर

समस्तीपुर शहर के सदर अस्पताल में शुरू हुई कोरोना संक्रमण की जांच

कोरोना कोविड19 संकट से निपटने के लिये अब सदर अस्पताल में भी जांच की व्यवस्था की गयी है। ताकि कोरोना संदिग्ध मरीजों की जांच सदर अस्पताल में ही आसानी से की जा सके। जिले में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुये टू नेट मशीन (क्वाट्रो मशीन) सदर अस्पताल में स्टॉल की गयी है।

टू नेट मशीन के स्टॉल करने के साथ ही लोगों के सैंपल की जांच भी शुरू कर दी गयी है। पोस्टमार्टम हाउस में फिलहाल जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है। शनिवार शाम उक्त जांच मशीन को स्टॉल करने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू की गयी। सात लोगों के सैंपल की जांच की गयी। डॉक्टरों व लैब टेक्नीशियन द्वारा उक्त मशीन से की गयी जांच में सभी की रिपोर्ट निगेटिव निकली। रविवार से विधिवत इसका शुभारंभ किया गया।

24 घंटे में अधिकतम पचास की जांच

सीएस डॉ. आरआर झा ने बताया कि सदर अस्पताल में टू नेट मशीन को इस्टॉल कर दिया गया है। जांच प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है। उन्होंने बताया कि 24 घंटे में अधिकतम पचास सैंपलों की जांच सदर अस्पताल में की जायेगी। इससे अधिक सैंपल होने पर पटना भी जांच के लिये भेजा जायेगा। कोरोना के बढ़ते मरीज को देखते हुये सदर अस्पताल में जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है।

जांच की चार अधिकारी कर रहे मॉनिटरिंग

कोरोना जांच के लिये लगाये गये जांच व्यवस्था की मॉनीटरिंग के लिये चार अधिकारियों की तैनाती की गयी है। ताकि जांच के दौरान किसी भी सामग्री व सुविधा की कमी नहीं हो सके। इसके लिये एसीएमओ डॉ. जितेंद्र कुमार, संचारी रोग अधिकारी (सीडीओ) श्रीराम प्रसाद, डीपीएम एसके दास एवं आईडीएसपी एएल सिद्दीकी को जवाबदेही सौंपी गयी है। आरएनटीसीपी में तैनात लैब टेक्नीशियन की मदद से जांच कार्य पूरी करायी जा रही है।

डिटेक्टर मशीन में एक बार में डाला जाता है चार सैंपल

कोरोना कोविड19 की जांच प्रक्रिया आसान नहीं है। इसके लिये कई प्रक्रियाओं से सैंपल को गुजारा जाता है, ताकि कोई गड़बड़ी नहीं हो सके। टू नेट मशीन यानी क्वाट्रो मशीन में दो तरह की जांच मशीन होती है। सबसे पहले सैंपल को समुचित व्यवस्था के तहत एकत्रित कर एक-एक सैंपल बारी-बारी से आरएनए स्ट्रैक्टर मशीन में डाला जाता है। फिर वहां की जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे डिटेक्टर मशीन में सैंपल को डाला जाता है। फिर उक्त मशीन में लगभग तीस से चालीस मिनट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे फाइनल किया जाता है। डिटेक्टर मशीन में एक बार में अधिकतम चार सैंपल ही दिया जा सकता है।

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