Protest Against Agriculture Bill
बिहार

कृषि कानून को वापस लेने को लेकर वामपंथी दलों ने बिहार में निकाला मार्च

दिल्ली में संघर्षरत किसानों के पक्ष में एकजुटता एवं केन्द्र सरकार की दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ वामपंथी दल सीपीआई (एम), सीपीआई और सीपीआई(माले) के आह्वान पर बुधवार को पटना समेत राज्यभर में प्रतिरोध मार्च निकाला गया। पटना के बुद्ध स्मृति पार्क के बाहर वामपंथी दलों के राज्य स्तरीय नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के अलावा रंगकर्मी व बुद्धिजीवी बड़ी संख्या में एकजुट हुए। चार सदस्यीय अध्यक्ष मंडली ने सभा का संचालन किया। 

अध्यक्ष मंडली में सीपीआई(एम) के अरुण कुमार मिश्र, सीपीआई के जानकी पासवान, माले के राजा राम एवं राजद के आलोक मेहता शामिल थे। सीपीआई(एम) के राज्य सचिव अवधेश कुमार ने किसानों के संघर्ष एवं मांगों के प्रति पूरी एकजुटता दिखाते हुए केन्द्र सरकार की दमनात्मक कार्रवाइयों की निन्दा की। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह आंदोलन काले कृषि कानूनों को वापस लिये जाने के बाद ही समाप्त होगा। उन्होंने बिहार सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बिहार के किसान औने-पौने दामों पर अपना धान बेचने को मजबूर हैं।

उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि बिहार के किसान पूरे बिहार को जाम कर देंगे। केन्द्र एवं राज्य सरकारों को कॉरपोरेट पक्षी कानून वापस करने के लिये मजबूर कर देंगे। यह मार्च यहां से निकलकर डाकबंगला चौराहे पहुंची। वहां प्रधानमंत्री का पुतला फूंका गया। मौके पर सर्वोदय शर्मा, गणेश शंकर सिंह, रामपरी, पटना जिला सचिव मनोज कुमार चन्द्रवंशी, राज्य कमेटी सदस्य भोला प्रसाद दिवाकर, देवेन्द्र चौरसिया, विश्वनाथ सिंह, रास बिहारी सिंह, सरिता पाण्डे, दीपक वर्मा, निषांत सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।  

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