Pollution
बिहार

प्रदूषण की गंभीर होती स्थित को लेकर अब बिहार के हर प्रमंडल मुख्यालय में खोली जाएगी जांच लैब

बिहार के सभी प्रमंडल मुख्यालयों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के क्षेत्रीय कार्यालय और लैब खोले जाने की योजना है। तब प्रदूषण की रोकथाम को प्रभावी उपाय हो सकेंगे। फिलहाल, राज्य में केवल मुजफ्फरपुर और बरौनी में ही पर्षद का क्षेत्रीय कार्यालय है। जबकि पटना, गया और पूर्णिया के क्षेत्रीय कार्यालय और लैब तो पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया स्थित पर्षद मुख्यालय में ही चल रहे हैं।

प्रदूषण की स्थिति दिन-ब-दिन भयावह होती जा रही है। बिहार के पटना, गया और मुजफ्फरपुर शहर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में लगातार शामिल रहे हैं। हवा जहरीली हो गई है और नदियों का पानी नहाने लायक भी नहीं बचा। असल में प्रदूषण की मार तो राज्य के बाकी शहर भी झेल रहे हैं लेकिन वहां इसे नापने की कोई सुविधा नहीं है। हालांकि राज्य सरकार अब विभिन्न जिलों में वायु गुणवत्ता मापने के 24 नए स्टेशन स्थापित करने जा रही है। लगातार बढ़ते जल और वायु प्रदूषण की रोकथाम को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) बेहद गंभीर है। ऐसे में राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।

महज मुख्यालय से राज्यभर में प्रदूषण की स्थिति और उसके रोकथाम के उपायों पर नजर और अमल की स्थिति देख पाना संभव नहीं है। ऐसे में पर्षद की पहुंच का विस्तार किए जाने की योजना है। राज्य में क्षेत्रीय कार्यालय बढ़ाए जाएंगे। इसे लेकर गत दिवस उपमुख्यमंत्री सह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री तार किशोर प्रसाद के समक्ष पर्षद के सदस्य सचिव एस. चंद्रशेखर ने परिवेश भवन में प्रजेंटेशन भी दिया था।

पूर्णिया में मिली जमीन
मुख्यालय में चल रहे पूर्णिया और गया के क्षेत्रीय कार्यालयों को वहीं खोले जाने की तैयारी है। क्षेत्रीय कार्यालय और लैब के लिए पूर्णिया में जमीन मिल चुकी है। अब वहां भवन का निर्माण होगा। वहीं गया में लैब और कार्यालय के लिए जमीन खोजी जा रही है।

लैब-दफ्तर खुलने से होगी सहूलियत
प्रमंडलों में लैब और कार्यालय खुलने से जल और वायु प्रदूषण की रोकथाम को प्रभावी उपाय हो सकेंगे। पर्षद द्वारा नदियों, तालाबों और भू-गर्भीय जल के नमूनों की जांच करता है। राज्यभर से नमूने मुख्यालय आते हैं। प्रमंडल स्तर पर लैब खुल जाने से नमूनों की जांच का काम आसान होगा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत कचरे और बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण कराने की स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण हो सकेगा। प्रमंडलवार शहरी निकायों, यातायात, निर्माण कार्यों, बायो मेडिकल वेस्ट, औद्योगिक कचरे के निस्तारण पर नजर रखी जा सकेगी।

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