पटना बिहार

लॉकडाउन का असर, पटना में अब कम होने लगा वायरस का प्रकोप, होली के बाद अचानक बढ़ गए थे मामले

पटनावासियों के लिए राहत भरी खबर है। जिले में कोरोना वायरस का प्रकोप धीरे-धीरे कम होने लगा है। जिला प्रशासन का कहना है कि पिछले तीन दिनों से संक्रमण की दर कम हो रही है। दूसरी लहर में जिले में 26 अप्रैल को सबसे ज्यादा संक्रमण दर थी। तब संक्रमण की दर 39.5 फीसदी तक पहुंच गई थी। यही वह समय था जब पटना के अस्पतालों में बेड के लिए मारामारी मची थी। 6 मई को यह दर घटकर 11.4 फीसदी रह गई है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि आंकड़ों से लग रहा है कि दूसरी लहर का पिक जा चुका है। संक्रमण दर घटने का कारण लॉकडाउन के दौरान सख्ती को भी माना जा रहा है। इससे चेन टूटने में मदद मिली है। डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन ने अध्ययन करवाया है। उसके अनुसार संक्रमण दर घट रही है। पिछले तीन दिनों में मरीजों की संख्या में गिरावट आई है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले एक सप्ताह में संख्या और कम होगी। इसका मुख्य कारण यह है कि धीरे-धीरे वायरस की चेन टूट रही है। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट सरकार और डब्ल्यूएचओ को भी भेजी गई है। 

लोगों की लापरवाही पड़ सकती है भारी 
स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य तौर पर वायरस की प्रकृति ऐसी नहीं होती है कि अचानक बीमारी का प्रकोप घटने लगे। ऐसे भी कोरोना वायरस के कई वैरिएंट आने के बाद आकलन करना बड़ा मुश्किल हो गया है। इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संक्रमण का प्रकोप कम होता है फिर भी लोगों को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। मास्क एवं हाथ सेनेटाइज करने का काम नियमित जारी रखना चाहिए। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन लोगों को करना चाहिए। अन्यथा संक्रमण को दोहराने में देर नहीं होगी। 
 
होली के बाद अचानक बढ़ गए थे मामले
इस साल होली के बाद कोरोना वायरस का संक्रमण काफी तेजी से फैला था। होली के पहले तक पटना जिले में 2 से 3 फीसदी संक्रमण था लेकिन 29 मार्च को होली समाप्त होने के बाद अचानक संक्रमण बढ़ गया। होली के 4 दिन बाद ही पटना जिले में 3 गुना अधिक संक्रमण दर बढ़ गया था। इसके बाद यह ग्राफ बढ़ते ही चला गया। विशेषज्ञ इस दौरान संक्रमण बढ़ने का मुख्य कारण लोगों द्वारा कोविड-19 के मानक का अनुपालन नहीं करना बता रहे हैं।

अप्रैल में साढ़े चार गुना बढ़ गई थी संक्रमण दर
अप्रैल में कोरोना संक्रमण की रफ्तार काफी तेज रही। इसने खतरनाक रूप अख्तियार कर लिया। यही कारण है कि अप्रैल में संक्रमण की दर साढ़े चार गुणा बढ़ी। एक अप्रैल को संक्रमण दर 8.5 फीसदी थी। वहीं, 21 अप्रैल को 26 फीसदी और 26 अप्रैल को 39.5 फीसदी हो गई। 26 अप्रैल के बाद संक्रमण दर घटने लगी थी। 4 मई को यह 20 फीसदी और 6 मई को घटकर 11.4 फीसदी हो गई है। हालांकि इस दौरान जांच की संख्या भी कम हुई है। अधिकारियों का कहना है कि पहले से बैकलॉग सैंपल की रिपोर्ट आ रही है। इस कारण रोजाना मरीजों की संख्या ज्यादा दिख रही है। 

आंकड़ों के अध्ययन के अनुसार जिले में संक्रमण दर घट रही है। आमलोगों का सहयोग भी संक्रमण चेन तोड़ने में जरूरी है। लोग सावधानी बरतेंगे तो जल्द ही काबू पा लिया जाएगा। 
– डॉ. चंद्रशेखर सिंह, डीएम पटना। 

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