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अच्छी खबर! बिहार के कोसी और कुरसेला क्षेत्र में बढ़ रही डॉल्फिन और पक्षियों की संख्या

बिहार कोसी, नवगछिया और कुरसेला क्षेत्र में डॉल्फिन व पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे पर्यावरण के दृष्टिकोण से काफी बेहतर माना जा रहा है। हाल में दस फरवरी से 16 मार्च तक चले एक माह के सर्वेक्षण और गणना में कोसी नदी में 194 गांगेय प्रजाति के छोटे-बड़े डॉल्फिन कोसी नदी में सहरसा व  सुपौल जिले और नवगछिया, कुरसेला क्षेत्र में पाए गए। जो पांच साल पूर्व 28 से 31 मार्च 2016 तक किए गए सर्वेक्षण में मिली डॉल्फिन की संख्या से 139 अधिक है।

 260 किमी की दूरी में नाव से सर्वेक्षण 
वहीं इस बार सौ से अधिक प्रजाति के पक्षी भी देखे गए, जिसमें लुप्त मान ली गई कई पक्षी भी शामिल है। पक्षियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है, पांच साल पूर्व 99 प्रजाति की पक्षी ही देखी गई थी। इस बार नेपाल बॉर्डर से सुपौल, सहरसा होते कुरसेला तक कोसी नदी में 260 किमी की दूरी में नाव से सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण टीम का नेतृत्व जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया गंगा समभूमि प्रादेशिक केंद्र पटना के वरीय वैज्ञानिक व क्षेत्रीय निदेशक डॉ. गोपाल शर्मा ने किया। टीम में उनके साथ बिहार के पक्षियों पर किताब लिख चुके नवीन कुमार, डॉल्फिन एवं जैव विविधता के क्षेत्र में काम करने वाले दीपक कुमार सहित 13 वैज्ञानिक थे। वहीं वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की तरफ से सुपौल और सहरसा के डीएफओ, रेंज ऑफिसर व वनपाल थे। सर्वेक्षण टीम का नेतृत्व करने वाले जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया गंगा समभूमि प्रादेशिक केंद्र पटना के वरीय वैज्ञानिक व क्षेत्रीय निदेशक डॉ. गोपाल शर्मा ने कहा कि गणना अभी भी जारी है और संभावना है डॉल्फिन की संख्या 200 पर पहुंच जाएगी। 

सर्वेक्षण के दौरान 94 डॉल्फिन देखे गए
सर्वेक्षण के दौरान सहरसा जिला क्षेत्र में 70, सुपौल में 30 और भागलपुर डिवीजन के नवगछिया से कुरसेला तक 94 डॉल्फिन देखे गए। डॉल्फिन तीन मीटर तक का देखा गया। सर्वेक्षण टीम का हिस्सा रह चुके सुपौल के वन प्रमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार शरण ने कहा कि सौ से अधिक प्रजाति की पक्षी देखी गई। वास्तविक संख्या का आंकलन करने के बाद कोसी नदी में पल रहे डॉल्फिन सहित अन्य जलीय जीवों के संरक्षण का प्रस्ताव तैयार करते राज्य सरकार को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉल्फिन जिसे यहां स्थानीय लोग सोंस के नाम से अधिक जानते हैं उसकी विशेषता और नदी में होने की आवश्यकताओं के संबंध में आसपास के लोगों को बताते हुए संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें यह बताया गया कि डॉल्फिन मीठे पानी का सबसे उच्चस्थ परभक्षी प्राणी है। जिसका भोजन छोटी-छोटी मछलियां होती है। मछुआरे बड़ी मछलियां पकड़ते इस कारण इनका आपस में कोई कम्पीटिशन नहीं होता। मछुआरों को सलाह और चेतावनी दी गई है कि मछलियों को पकड़ने के लिए वे जाल नहीं लगाए। अगर ऐसा करते पाए गए तो जाल को जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

हिमालयन ग्रिफिन जैसी लुप्त मान ली गई पक्षी भी मिले
सर्वेक्षण के दौरान हिमालयन ग्रिफिन जैसी लुप्त मान ली गई पक्षी भी देखी गई। वैज्ञानिक ने कहा कि कोसी क्षेत्र में पहली बार कॉमन शेल डक नामक पक्षी भी देखी गई। इंडेजर, रेयर इंडेजर, बड़ा व छोटा गरुड़ सहित अन्य पक्षियों को देखा गया।

डॉल्फिन सतह से अधिक ऊंची छलांग नहीं लगा पाते
एफओ ने कहा कि कोसी नदी की पानी की गहराई कम होने के कारण डॉल्फिन सतह से अधिक ऊंची छलांग नहीं लगा पाते। इन्हें सांस लेने के लिए तीन से चार मिनट पर सतह के ऊपर आना पड़ता है। लेकिन जब डॉल्फिन पानी के अंदर जाती तब यह पता करना मुश्किल हो जाता कि यह कहां गई और कितनी दूरी पर फिर से बाहर निकलेगी। डीएफओ ने कहा कि डॉल्फिन की संख्या जितना अधिक होगी उतना नदी का पानी स्वच्छ और निर्मल होगा। डॉल्फिन की संख्या और घूमने की प्रवृति से नदी के स्वास्थ्य का पता चलता है। इसका घूमना नदी की गहराई और जलप्रवाह पर भी निर्भर करता है। पांच साल पूर्व 2016 में तिलकामांझी विश्वविद्यालय भागलपुर के वनस्पति विभाग हेड प्रो. सुनील कुमार चौधरी, रिसर्चर सुभाशीष डे, डॉ. ब्रजनंदन कुमार, मयूख डे, नचिकेत केलकर, तत्कालीन सहरसा डीएफओ सुनील कुमार ने सर्वेक्षण व गणना किया था। उसके बाद सहरसा और सुपौल के डीएफओ के द्वारा सरकार को कई बार डॉल्फिन सहित अन्य जलीय जीवों के संरक्षण के लिए पर्याप्त राशि आवंटन की मांग की गई पर वह सिर्फ फाइल तक दौड़ता रही। फिर फ़ाइल तक ही संरक्षण की योजना नहीं सिमटे उसे ध्यान देने की जरूरत है। 

सर्वेक्षण का नेतृत्व करने वाले भारतीय प्राणी सर्वेक्षण संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. गोपाल शर्मा ने कहा कि काफी संख्या में मिले डॉल्फिन और पक्षियों को पर्यावरण के दृष्टिकोण से बचाने के लिए संरक्षण करने की जरूरत है। नेपाल बॉर्डर से कोसी क्षेत्र व कुरसेला का इलाका काफी दुर्गम है वहां वन विभाग को जलीय जीवों के संरक्षण के लिए काम करने की जरूरत है।

वहीं सुपौल के वन प्रमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार शरण ने कहा कि कोसी नदी में दिखे डॉल्फिन सहित अन्य जलीय जीवों के संरक्षण के लिए प्रस्ताव तैयार करते राज्य सरकार को भेजा जाएगा। 

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