समस्तीपुर

समस्तीपुर में कहर बरपाने को बेताब दिख रही बूढ़ी गंडक

समस्तीपुर । समस्तीपुर में बूढ़ी गंडक खतरे के लाल निशान से 2.77 मीटर उपर बह रही है। इसके साथ ही जलस्तर में तेजी से इजाफा भी हो रहा है। नदी की उफनती धारा सभी बंदिशों को तोड़ कर कहर बरपाने के लिए बेताब दिख रही है। स्थिति यह है कि तटबंध पर पानी का अधिक दबाब पड़ने लगा है। बाढ़ की आशंका से लोग घिरे हैं। शुक्रवार को बूढ़ी गंडक समस्तीपुर- दरभंगा रेलवे पुल के निकट खतरे के निशान से 2.77 मिटर उपर पहुंच गई। मगरदही घाट के निकट बने पुराने ब्रिज और समस्तीपुर- दरभंगा रेलवे पुल के गाटर से टकरा रही है। इसको लेकर जिला प्रशासन द्वारा एहतियातन दोनों ब्रिज को बांस बल्ला से सील कर आवाजाही रोक दी गई है। वहां सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया। संभावित खतरे को लेकर जिला प्रशासन हाई अलर्ट है। नदी के दोनों ओर तटबंध और स्लूस गेट पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पानी का अधिक दबाव वाले स्थान पर सैंड बैग भरने का कार्य किया जा रहा है। आला अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हैं। प्रशासनिक पदाधिकारी तटबंध का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सावधान, सतर्क और सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील की जा रही है।

आपदा प्रबंधन शाखा से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले एक सप्ताह से बूढ़ी गंडक के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। शुक्रवार को सुबह बूढ़ी गंडक का जलस्तर 48.50 मीटर पहुंच गई। पिछले 24 घंटे में जलस्तर में 18 सेंमी इजाफा हुआ। समस्तीपुर रेलवे पुल के निकट बूढ़ी गंडक खतरे का लाल निशान 45.72 है। वहीं उच्चतम जलस्तर का मानक 48.73 है। यानि नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 2.77 मीटर ऊपर और उच्चतम जलस्तर के बने मानक से 0.33 सेमी नीचे है। इस तरह अगर लगातार जलस्तर में वृद्धि होती रही तो नदी उच्चतम जलस्तर के बने मानक को छूकर वर्ष 1987 और 2007 के रिकार्ड को पार कर जाएगी। बता दें कि वर्ष 1987 और 2007 में उच्चतम जलस्तर का मानक 48.83 सेमी रिकार्ड दर्ज किया गया था। इधर, तटबंध पर लगातार पानी के दबाव के कारण कई स्थानों पर रिसाव भी हुआ लेकिन तत्काल उसे बंद कर दिया गया। लोग बाढ़ की आशंका से भयभीत हैं। तटबंध किनारे रहने वाले लोग रतजगा कर रहे हैं।

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