पटना बिहार

बिहार : सुशांत के गुरजने के बाद पटनावासियों की आंखें नम , मलडीहा में नहीं जले चूल्हे

अपने चहेते अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के गुजर जाने के बाद पटना के राजीवनगर के मोहल्लों में सोमवार को भी मातम पसरा रहा। मुंबई जाने के लिए जब पिता और भाई घर से निकले तो वहां मौजूद हर शख्स रो पड़ा। पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार का हृदयविदारक दृश्य देख पटनावासियों की आंखें भी नम रहीं। वहीं, उनके  पैतृक गांव पूर्णिया के मलडीहा के घरों में चूल्हे नहीं जले। 

सोमवार सुबह उनके पिता को मुंबई के लिए रवाना होना था। मगर उनके रवाना होने से पहले भी कई परिजन और मोहल्ले के लोग मिलने पहुंचे । सुबह करीब आठ बजे तक राजीव नगर रोड नंबर 6 स्थित उनके निवास के बाहर प्रशंसकों की भीड़ लगने लगी। कई लोग इस गली में मॉर्निंग वॉक करने निकले थे। वह भी उनके पिता को सांत्वना देने पहुंचे। मोहल्लेवासी बालेश्वर सिंह भी उनसे मिलने पहुंचे lवहीं जदयू प्रवक्ता संजय सिंह और चिकित्सक जितेंद्र सिंह भी लगभग आठ बजे उनके निवास पहुंचे और पिता जी से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। मोहल्लेवाले पूरी तरह शोक में डूबे रहे। बिहार का नाम रोशन करने वाले लाल का इस तरह चले जाने का गम हर किसी को सता रहा था।

सुबह नौ बजे जब उनके पिता केके सिंह, भाई विधायक नीरज सिंह बबलू और परिजन घर से बाहर निकले तो बाहर खड़े प्रशंसकों की आंखें नम हो उठी। आंसू पोंछते हुए लोग सिसिकने लगे। पिता के लड़खड़ाते कदम को सुशांत के चचेरे भाई और विधायक नीरज बबलू संभाल रहे थे। नीरज बबलू अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ उनके पिता को लेकर मुंबई रवाना हो गए।

अंतिम संस्कार की खबरें पहुंचने पर गांव में चीख चीत्कार
अभिनेता सुशांत राजपूत की मौत के बाद से उनके पैतृक गांव मल्लडीहा में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। आसपास के गांवों में भी सोमवार को मातम छाया रहा। मल्लडीहा गांव की सभी सड़कें वीरानी नजर आ रही हैं। गांव के दरवाजे लगभग सुने पड़े हुए हैं। गांव में घरों में चूल्हा तक नहीं जला। मातम का माहौल ऐसा बना हुआ है कि किसी से भी सुशांत के बारे में बात करने पर उनकी आखें छलक उठती हैं। बुजुर्गों ने उसे याद करते हुए कहा कि इस तरह उसका अचानक चला जाना काफी कष्ट दे रहा है। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव के किसी भी घर में रविवार की रात्रि से चूल्हा तक नहीं जला है। दोपहर बाद जैसे ही सुशांत के अंतिम संस्कार की खबरें मल्लडीहा गांव तक पहुंची समूचे गांव का माहौल क्रन्दन एवं चीत्कार में बदल गया। मुंबई में अंतिम संस्कार की खबर सुनते ही कई घरों की महिलाएं दहाड़ मारकर रोने-बिलखने लगी। गांव में दूसरे दिन भी मातम पसरा रहा।

…काश हो पाता अंतिम दर्शन
मलडीहा गांव के लोगों का यही अरमान था कि सुशान्त का पार्थिक शरीर अगर अपने पैतृक गांव आता तो एक बार उनका अंतिम दर्शन हो पाता मगर ऐसा नहीं हुआ।  गांव में आज दूसरे दिन भी कई सड़कें सुनसान नजर आयी। सभी गाँव वाले समाचार पत्रों में उनकी खबरें पढ़ रहे थे। टीवी और मोबाइल पर अंतिम विदाई देखने में लगे थे। पूरा गांव सुनसान दिख रहा था।

…स्कूल के मैदान में लगाए थे चौके-छक्के
गांव के मध्य विद्यालय के मैदान में युवाओं द्वारा दो दिनों से क्रिकेट बंद कर दिया गया है। ग्रामीण युवा नितदिन यहां क्रिकेट खेला करते थे मगर उसी मैदान में पिछले साल  सुशांत भी कुछ युवाओं के साथ क्रिकेट खेला था। सुशांत ने खूब चौके-छक्के लगाए थे। मैदान के बगल में उनका एक बड़ा आम का बगीचे में बना मचान को युवा दिखा कर कहते हैं इसी मचान पर आ कर वह रुके ओर सभी युवाओं से बातचीत की थी।

…मचान पर पिछले साल ली थी सुशांत के साथ सेल्फी
गांव के बीचोबीच बने मचान पर बैठे मलडीहा गांव के युवा ओंकार कुमार सिंह, राहुल कुमार सिंह, कन्हैया कुमार सिंह, मोती सिंह से जब सुशांत के संबंध में जानने का प्रयास किया गया तो सभी युवक काफी भावुक हो गए। भावुक स्वर में युवाओं ने कहा कि उनके बीच से गांव का अनमोल मोती गुलशन अचानक उनलोगों को छोड़कर चला गया। बीते दिनों को याद करते हुए युवाओं ने कहा कि इसी मचान पर पिछले वर्ष सुशांत राजपूत के साथ उनलोगों ने  सेल्फी ली थी। आज इस मचान पर बैठने का मन भी नहीं कर रहा है।

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