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बिहार

बिहार में अब ट्रेनिंग के दौरान पुलिसकर्मियों की नहीं लगेगी ड्यूटी, मुख्यालय ने जारी किया आदेश

बिहार में अब ट्रेनिंग के दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों की ड्यूटी अब नहीं लगेगी। विधि-व्यवस्था से जुड़ा कार्य हो या किसी दूसरे काम में भी उन्हें नहीं लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले महीने विधि-व्यवस्था की समीक्षा की थी, साथ ही उनके द्वारा एसएसपी, एसपी, रेंज आईजी-डीआईजी को संबोधित किया गया था। उसी दौरान यह निर्णय लिया गया था कि ट्रेनिंग कर रहे पुलिस अधिकारियों और जवानों को ड्यूटी पर नहीं लगाया जाएगा। अब पुलिस मुख्यालय ने इसका आदेश जारी कर दिया है।

पुलिस अधिकारी और जवान बेसिक ट्रेनिंग कर रहे हैं तो किसी भी कीमत पर उनकी ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। उन्हें किसी भी विधि-व्यवस्था ड्यूटी और दूसरे काम में प्रतिनियुक्त नहीं किया जा सकता। सीनियर लीडरशीप कोर्स (एसएलसी) और प्रमोशनल ट्रेनिंग कोर्स (पीटीसी) के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रशिक्षु को भी वैसे तो ड्यूटी नहीं देनी है। पर अपरिहार्य स्थिति में यदि उनकी ड्यूटी लगानी भी है तो डीजीपी की इजाजत लेकर ही विधि-व्यवस्था और अन्य कार्यों में उन्हें प्रतिनियुक्त किया जा सकता है। 

राज्य में अक्सर विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगती है। इससे ट्रेनिंग का काम काफी प्रभावित होता है। जो ट्रेनिंग एक वर्ष में समाप्त होनी चाहिए, उसमें दो साल तक का वक्त लग जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि पर्व-त्योहार के अवसर पर खासकर प्रशिक्षुओं को जिलों में विधि-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर प्रतिनियुक्त कर दिया जाता है। कई दफे तो यह प्रतिनियुक्ति महीनों तक रहती है।

एसएलसी और एएसआई बनाने के लिए पीटीसी करना अनिवार्य
पुलिस में कई तरह की ट्रेनिंग होती है। जवान या अधिकारी जब पुलिस में बहाल होते हैं तो उन्हें दी जानेवाली शुरुआती प्रशिक्षण को बेसिक ट्रेनिंग कहते हैं। इस दौरान उन्हें कानून की पढ़ाई के साथ आउटडोर और इंडोर ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें पीटी-परेड से लेकर हथियार चलाना, बाधाओं को पार करना समेत कई विधिओं में माहिर बनाया जाता है। इसके अलावा प्रोन्नति हेतु भी प्रशिक्षण होता है। हवलदार बनाने के लिए एसएलसी और एएसआई बनाने के लिए पीटीसी करना अनिवार्य है।   

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