बिहार विधानसभा चुनाव 2020

नित्यानंद राय का सियासी सफर: गांव की राजनीति से गृह राज्यमंत्री के पद तक पहुंचे

भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को तत्कालीन सरकार के ऐलान के बावजूद हाजीपुर से सकुशल पार कराने को लेकर बिहार की राजनीति में चर्चित हुए नित्यानंद राय की पहचान एक निर्भिक नेता की रही है। तत्कालीन सरकार से सीधे दो-दो हाथ करने की उस घटना के बाद उनकी राजनीति परवान चढ़ी। गांव-देहात की राजनीति करते हुए वे देश के गृह राज्यमंत्री के पद तक पहुंचे।

साल 1990 में बतौर सीएम लालू प्रसाद ने ऐलान किया था कि वे आडवाणी के रथ को गांधी सेतु पार नहीं करने देंगे। उस समय नित्यानंद मात्र 23 वर्ष के थे। महापंचायत बुलाकर ऐसा जनसमर्थन जुटाया कि सरकार आडवाणी का रथ हाजीपुर में रोकने का साहस नहीं जुटा पाई। यही नहीं, सरकार को सीधे चुनौती देने वाले नित्यानंद ने हाजीपुर में आडवाणी की जनसभा भी कराई। हालांकि सरकार से लोहा लेने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित बिहार की प्लास्टिक हाउसहोल्ड निर्माण की पहली प्राइवेट लिमिडेट कंपनी की फैक्ट्री, जो प्लास्टिक की बाल्टियां बनाने में अग्रणी थी, उसे बंद करना पड़ा। लेकिन इस प्रकरण के बाद नित्यानंद राय लगातार चर्चा में बने रहे।


छात्र जीवन से ही कर रहे राजनीति
भाजपा में बेखौफ व निर्भिक कार्यकर्ता के तौर पर पहचान बना चुके नित्यानंद राय की राजनीतकि सफर की शुरुआत 1981 में छात्र जीवन के दौरान ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में हुई। हाजीपुर के ही राजनारायण कॉलेज में इंटर की पढ़ाई के दौरान वे नियमित संघ की शाखाओं में जाते रहे। उनकी नेतृत्व क्षमता की वजह से संघ ने उन्हें 1986 में हाजीपुर का तहसील कार्यवाह बनाया। 1990 के शुरुआत में ही संघ से पदमुक्त होकर वे भाजपा की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो गए। उन्हें युवा मोर्चा का प्रदेश सचिव बनाया गया। 1995-96 में युवा मोर्चा के महासचिव और 1999 में युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने।

2000 में पहली बार बने विधायक
लगभग 10 वर्षों तक संगठन का कामकाज संभालने के बाद साल 2000 के विधानसभा चुनाव में नित्यानंद राय को हाजीपुर से टिकट मिला और वे चुनाव जीत गए। उनकी विधानसभा में इंट्री हुई। इसके बाद वे हाजीपुर से लगातार चार विधानसभा चुनाव जीते। जब साल 2014 में उजियारपुर से लोकसभा पहुंचे तो उन्होंने अपने बदले हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र में मंडल स्तर के ऐसे कार्यकर्ता को चुनाव जितवाया, जो जातिगत समीकरण में कहीं भी फिट नहीं बैठते थे। 2015 के विपरीत माहौल में भी हाजीपुर सीट भाजपा के खाते में गई। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली करारी हार के बाद किसी नए चेहरे को पार्टी की कमान सौंपने को सोंच के तहत तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तब पिछड़ा कार्ड खेलते हुए नित्यानंद राय को इसके लिए चुना। नवम्बर 2016 में नित्यानंद राय को बिहार भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया। साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान नित्यानंद राय के अध्यक्षीय कार्यकाल में भाजपा ने अपने कोटे की सभी 17 तो एनडीए ने 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की।

परिवारवाद के खिलाफ
नित्यानंद परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं। उन्हें यह सीख अपने पिता से ही मिली। जब नित्यानंद पहली बार विधायक चुने गए तो उनके पिता विष्णु राय (अब दिवंगत) ने उस समय एक सप्ताह के भीतर ही मुखिया पद से इस्तीफा दे दिया और जिम्मेवारी उप मुखिया को दे दी। साल 2015 के विस चुनाव में पार्टी ने नित्यानंद के परिवार से ही किसी को राघोपुर से चुनाव लड़ाना चाहा, जिसे उन्होंने साफ इनकार कर दिया।

70 दिव्यांग बच्चे को लिया गोद
नित्यानंद राय ने 70 दिव्यांग बच्चों को गोद ले रखा है। पीएम के 70वें जन्म दिन के मौके पर उन्होंने 70वें बच्चे को गोद लिया। इन बच्चों के रहने, खाने, पीने से लेकर पठन-पाठन की व्यवस्था वह खुद करते हैं। अनाथ लड़कियों की शादी का खर्च भी वह वहन करते हैं। वृंदावन स्थित साध्वी ऋतंभरा के अनाथ आश्रम के 5 बच्चों की पढ़ाई और रहने का खर्च उठाते हैं।

खुद करते हैं खेती
गृह राज्यमंत्री होने के बावजूद किसानी पृष्ठभूमि और इतिहास में स्नातक नित्यानंद राय को अब भी खेती से लगाव है। कई एकड़ में अमरूद, केला और सब्जियों की खेती करते हैं। मौका मिलते ही वे खुद हल और ट्रैक्टर से जुताई करने लगते हैं। अपने घर के लिए वे पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती करते हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान नित्यानंद राय स्वच्छता अभियान के दौरान पटना की सड़कों पर भी ट्रैक्टर चला चुके हैं।

पैंट-शर्ट ही पहनते हैं
राजनेताओं की वेश-भूषा से अलग नित्यानंद की पहली पसंद पैंट-शर्ट है। वैसे गांव में धोती पहनना उनकी पहली पसंद है। खाने में सरसों का साग, मक्के की रोटी और दूध-दही पसंद है। फिटनेस के लिए योग और व्यायाम के बाद वे छाछ से अपने दिन की शुरुआत करते है। सामान्य मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले नित्यानंद राय साप्ताहिक रूटीन बनाकर काम करते हैं। खेलकूद में फुटबॉल के शौकीन हैं।

संसदीय पारी
2000 : पहली बार विधायक बने
2005 – 2010 : हाजीपुर से ही विधायक चुने गए
2014 : उजियारपुर से पहली सांसद चुने गए
2019 : दूसरी बार लोकसभा के लिए चुने गए
2019 : देश के गृह राज्यमंत्री बने


व्यक्तिगत जीवन
जन्म 1 जनवरी 1966
जन्म स्थल -कर्णपुरा, जढुआ
जिला – वैशाली
पत्नी – अमिता राय
संतान – एक पुत्री

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