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डिजिटल लेनदेन फेल होने पर सख्त RBI, जानें ट्रांजेक्शन फेल होने पर कहां करें शिकायत

डिजिटल लेनदेन विफल होने की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सख्त कदम उठाया है। आरबीआई ने निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक को नए डिजिटल सेवा और क्रेडिट कार्ड जारी करने पर रोक लगा दी है।

बैंकिंग इतिहास में यह पहली घटना है जब आरबीआई ने किसी बैंक को नए डिजिटल सेवा को रोकने का आदेश दिया है। अब से पहले तक आरबीआई बैंकों को चेतावनी देकर छोड़ देता था। हालांकि, डिजिटल लेनदेन में गड़बड़ी की समस्या सिर्फ एचडीएफसी बैंक के साथ ही नहीं हुई है। बुधवार को ही देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहक भी सोशल मीडिया के जरिये अपनी शिकायत दर्ज करा चुके हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में एसबीआई, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, कैनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और कोटक महिंद्रा बैंक में डिजिटल लेनदेन में परेशानी के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। माना जा रहा है कि डिजिटल लेनदेन के बीच ट्रांजैक्शन फेल से ग्राहकों की परेशानी को देखते हुए आरबीआई ने यह कदम उठाया है।
प्रतिस्पर्धा से बढ़ी परेशानी

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में डिजिटल लेनदेन में नए प्लेयर्स के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। इससे पहले से इस क्षेत्र में काम करे बैंकों पर दबाब बढ़ा है। इसके चलते कई बार बैंक नए उत्पाद को बिना पूरी तरह से जांच किए बाजार में उतार दे रहे हैं जिससे समस्या आ रही है। बैंकों को अब किसी भी उत्पाद को बाजार में लाने से पहले यह सुनिश्चत करना होगा कि उनके पास उसको मैनेज करने के लिए पूरी व्यवस्था है। ऐसा नहीं करने पर आगे भी समस्या आती रहेगी।
 

आरबीआई ने वजह बताने को कहा था

एचडीएफसी बैंक के डिजिटल सर्विसेज में लगातार रुकावट को लेकर आरबीआई ने बैंक से इसकी वजह बताने को कहा था। एचडीएफसी बैंक के डेटा सेंटर में गड़बड़ी की वजह से इसके यूपीआई पेमेंट, एटीएम सर्विेसेज और कार्ड से होने वाली पेमेंट रुक गए थे एचडीएफसी बैंक के डिजिटल सर्विसेज में पिछले दो साल में तीन बार इस तरह की गड़बड़ी सामने आई है। आरबीआई ने कहा है कि इसके डेटा सेंटर में अगर गड़बड़ी आई है तो इसकी वजह बताई जाए।
 

एसबीआई के ग्राहकों को भी परेशानी

बुधवार को भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा था। दरअसल, योनो ऐप का इस्तेमाल करने में ग्राहकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ था। एसबीआई के ग्राहकों ने सोशल मीडिया के जरिये शिकायत की है कि बैंक की ऑनलाइन लेन-देन फेल हो रहे हैं। कुछ ग्राहकों ने कहा है कि वे एसबीआई के योनो ऐप में लॉग-इन नहीं कर पा रहे हैं। लॉग-इन करने उन्हें स्क्रीन पर एरर मैसज दिख रहा है। एसबीआई से नाराज एक ग्राहक ने की सोशल मीडिया में शिकायत, खाता बंद कराने की मांगी मदद की थी।

आठ बैंकों के ग्राहकों को भी झेलनी पड़ी मुसीबत
कोरोना महामारी के बीच डिजिटल भुगतान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही ऑनलाइन भुगतान फेल होने के मामले भी तेजी से बढ़े हैं जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, डिजिटल भुगतान मामले में आठ बैंकों की व्यवस्था सबसे लचर रही है। इनमें चार सरकारी बैंक भी शामिल है।

सरकारी बैंकों की हालत सबसे खराब
एनपीसीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी बैंक में कॉरपोरेशन बैंक में ग्राहकों को सबसे अधिक परेशानियां झेलनी पड़ीं हैं। इसमें करीब 14.8 फीसदी लेनदेन फेल हुए हैं। वहीं, कैनरा बैंक में 9.8 फीसदी, बैंक ऑफ इंडिया में 4.2 फीसदी भुगतान फेल हुए हैं। वहीं देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक में 3.7 फीसदी लेनदेन फेल हुए हैं। वहीं, निजी बैंकों में एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में एक फीसदी से भी कम लेनदेन फेल हुए हैं। कोटक महिंद्रा बैंक के सबसे अधिक 2.36 लेनदेन अक्तूबर महीने में फेल हुए।

ट्रांजैक्शन फेल होने पर क्या करें
अगर आपका डिजिटल ट्रांजैक्शन करने पर पैसा वापस नहीं आता है तो आप यूपीआई ऐप जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए आपको पेमेंट हिस्ट्री ऑप्शन पर जाना होगा। यहां आपको रेज डिस्प्यूट पर जाना होगा। रेज डिस्प्यूट पर अपनी शिकायत दर्ज करा दें। बैंक आपकी शिकायत को सही पाने पर पैसा लौटा देगा।

बैंक देगा 100 रुपये रोज का हर्जाना

अगर आपने किसी को अपने यूपीआई से भुगतान किया और आपक खाते से पैसे कट गए आर दुकानदार को नहीं मिले तो घबराने की जरूरत नहीं है। इस तरह के मामलों में खाते से कटी रकम बैंक को तुरंत लौटानी होती है। अगर शिकायत दर्ज होने के सात दिनों के भीतर ग्राहक के खाते में पैसा नहीं आता है तो कार्ड जारी करने वाले बैंक को रोजाना 100 रुपये के हिसाब से हर्जाना चुकाना पड़ता है। फेल ट्रांजेक्शन के मामले में आरबीआई के ये नियम 20 सितंबर 2019 से लागू हैं।
डीसी बॉक्स

शिकायतों में मामले में दूसरे नंबर पर एचडीएफसी


देश में ग्राहकों की तरफ से सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के मामले में भी एचडीएफसी बैंक दूसरे नंबर पर रहा है। हिन्दुस्तान को सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक रिजर्व बैंक के कम्प्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम यानी सीएमए पोर्टल पर एक साल की अवधि में एचडीएफसी के खिलाफ 30 हजार शिकायतें आई थी।

1 जुलाई 2019 से 30 जून 2020 के दौरान बैंकिंग सिस्टम के खिलाफ कुल 3.80 लाख शिकायतें आईं थी जिसमें से सबसे ज्यादा 92 हजार शिकायतें भारतीय स्टेट बैंक को लेकर थीं। कोरोना महामारी के दौरान देशव्वापी लॉकडाउन के समय भी मार्च से जून 2020 के दौरान एसडीएफसी बैंक के ग्राहकों ने करीब 10 हजार शिकायतें दर्ज कराई थीं। आंकलन के मुताबिक रिजर्व बैंक के पास पहुंचने वाली कुल शिकायतों में से करीब 25-30 फीसदी शिकायतें डिजिटल लेन देन में आई मुश्किलों और बैंकों की तरफ से इसके लिए गलत शुल्क वसूलने जैसे मुद्दों से जुड़ी रहती है।
लंबी पाबंदी नहीं

जानकारों की राय में बैंक के उपर लगाई गई ये पाबंदी लंबे समय तक जारी नहीं रहेगी। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ योगेंद्र कपूर ने हिन्दुस्तान को बताया कि जैसे ही रिजर्व बैंक एचडीएफसी बैंक की तरफ से उठाए गए कदमों से संतुष्ट होगा उसके ऊपर लगाई पाबंदी हटा ली जाएगी। उन्होंने ये भी कहा कि इस एक्शन का देश के डिजिटल बैंकिंग सिस्टम पर कोई खास असर नहीं दिखेगा बल्कि ये कदम बैंकिंग सिस्टम को और भरोमंद बनाने की दिशा में उठाया गया लगता है।

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