Samastipur Vidhansabha Chunav 2020
समस्तीपुर

पढ़ें समस्तीपुर विधानसभा के दसों सीटों का सम्पूर्ण विश्लेषण, किस पार्टी के पाले में जायेगी कौन सी सीट?

समस्तीपुर: गठबंधन की राजनीति में तत्काल बदले हालात से कई पुराने समीकरण भी बदल जाते हैं और जो नए बनते, उसका गणित आसान नहीं होता। समस्तीपुर जिले में कुछ ऐसी ही राजनीतिक हवा है। दिल्ली-पटना में आलाकमान सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला इजाद कर रहे और यहां रणबांकुरों का हर सूत्र एक दूसरे से उलझ रहा। सीटों का बंटवारा ही यहां अंत-अंत तक राजनीतिक पंडितों के लिए दिलचस्प पहेली होगी। बूझो तो जानें… तब तक कई के तीर खाली जा चुके होंगे। चुनावी सरगर्मी बढ़ी नहीं कि एनडीए और महागठबंधन के नये-पुराने लड़ाके टिकट की रेस में शामिल हो गए हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव में समस्तीपुर जिले में पांच सीटों पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा को इस बार नया फॉर्मूला गढ़ना पड़ सकता है। जदयू के साथ होने से भाजपा को इस बार उन सीटों को छोड़ना पड़ सकता है, जहां से उसने पिछली बार प्रत्याशी उतारे थे। लोजपा को भी अपने लिए सीटों की डिमांड कम करनी पड़ सकती है। पिछले चुनाव में एनडीए से जदयू के अलग होने के बाद भाजपा बड़ी पार्टी की भूमिका में थी। उसने जिले की दस में से पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। बची पांच में से तीन सीटों पर लोजपा और दो सीट पर रालोसपा के उम्मीदवार थे। हालांकि सभी दस सीटों पर एनडीए के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था।

2015 में ये थी एनडीए की स्थिति

2015 के विस चुनाव चुनाव में भाजपा ने समस्तीपुर, मोरवा, मोहिउद्दीननगर, सरायरंजन और रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र में अपने उम्मीदवार उतारे थे जबकि कल्याणपुर, विभूतिपुर और वारिसनगर सीट लोजपा के खाते में गयी थी। वहीं उजियारपुर और हसनपुर सीट रालोसपा को दी गयी थी। तब एनडीए ने सभी जगहों पर महागठबंधन को चुनौती दी थी। कड़ी टक्कर के बावजूद एनडीए एक भी सीट नहीं जीत पाया। भाजपा ने रोसड़ा की अपनी जीती सीट भी गंवा दी थी। तब जदयू महागठबंधन का हिस्सा था। जदयू को पिछले चुनाव में हसनपुर, वारिसनगर, विभूतिपुर, कल्याणपुर, सरायरंजन और मोरवा में जीत मिली थी।

भाजपा ने मजबूत की है स्थिति

पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से जिले में भाजपा के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में अच्छी-खासी मेहनत कर पार्टी के जनाधार में वृद्धि की है। सामाजिक समीकरणों को भी दुरुस्त किया है। लेकिन सीटों के बंटवारे में जदयू अपने जीते हुए विधायकों के कारण उन सीटों पर समझौता करने की स्थिति में नहीं है। तब भाजपा नेताओं को उन सीटों पर अपने उम्मीदवार की बजाय गठबंधन के उम्मीदवार को जिताने के लिए काम करना होगा। हालांकि अभी सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है और कयासों का दौर जारी है। ऐसे में हर सीट पर कई-कई लड़ाकों की नजरें गड़ी हैं। अंदरखाने में सब अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं।

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Kunal Raj
Editor-In-Chief l Software Engineer l Digital Marketer