Leaders
समस्तीपुर

पढ़ें समस्तीपुर विधानसभा की सभी सीटों का चुनाव के बाद का विश्लेषण, किसने मारी बाजी किसने दिया धोखा

समस्तीपुर : मोहम्मद रफी के चर्चित गीतों में एक ‘दिल के टुकड़े हजार हुए कोई यहां गिरा कोई वहां गिरा. समस्तीपुर के चुनावी सियासत में 2020 पर सटीक बैठी। इसी वर्ष विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ। इसमें कितने ने अपने को अपनों से अलग किया तो कितने दूर खड़े लोगों को पास किया। कभी पार्टी को मजबूत करनेवाले सिपाही इधर- उधर मर्ज करते रहे तो जिले से बाहर के उम्मीदवारों को पनाह भी दिया। वैसे टिकट बंटवारे के बाद से ही जिले में समर्थन देने या राह दूजा करने का सिलसिला चल पड़ा था। जिसकी परिणति मतदान के दिन तक आते-आते सामने आ ही गई। जिले की राजनीतिक पीच पर भाजपा ने सबसे धुआंधार बैटिग की। परिणाम यह रहा कि सुखाड़ वाली इस जमीं पर दो सीट इसके खाते में आ गई। लेनिनग्राद कहे जाने वाले विभूतिपुर सीट पर दस वर्षो बाद लाल झंडे ने दस्तक दी। मोहिउद्दीनगर और उजियारपुर में दलीय प्रत्याशी के खिलाफ भाजपा के ही कुछ कार्यकर्ता लामबंद दिखे। तो समस्तीपुर और विभूतिपुर में कुछ कार्यकर्ता कहीं एनडीए उम्मीदवार जीत न जाए इसके लिए सबकुछ एक करते दिखे। जिले के दस विधानसभा क्षेत्र में से 2015 में छह पर जदयू, तीन पर राजद और एक पर कांग्रेस का कब्जा था। लेकिन 2020 के चुनाव में दस सदस्यीय विधानसभा में समीकरण कुछ बदल गया। इसमें चार पर राजद, तीन पर जदयू और दो पर भाजपा एवं एक पर माकपा का कब्जा हो गया। इस चुनाव की विशेषता रही कि चुनाव के बहाने ही सही लोगों को प्रधानमंत्री को सामने से देखने का एक मौका जरूर मिला। जितवारपुर हाउसिग बोर्ड के मैदान में लोगों ने तीन नवंबर को उनका भाषण सूना। लंबे अरसे बाद एक महती भीड़ वहां जुटी। तो दूसरी तरफ हसनपुर सीट से राजद के तेजप्रताप यादव के चुनाव लड़ने से यह सीट हॉट केक बना रहा। राजद को एक सीट का इजाफा 2015 के विधानसभा चुनाव की तुलना में राजद को एक सीट का इजाफा हुआ। 2020 में इसके हाथ से मोहिउद्दीननगर सीट निकल गई तो हसनपुर और मोरवा सीट पर उसने अपनी बढ़त बना ली। ले-देकर पूरे जिले में संख्या के आधार पर एक अधिक सीट पर पार्टी विजयी रही। समस्तीपुर, उजियारपुर, हसनपुर, मोरवा सीट पर जीत दर्ज कर राष्ट्रीय जनता दल ने अपनी मजबूत उपस्थिति का एहसास कराया। आलोक मेहता दूसरी बार उजियारपुर से विजयी रहे, तो अख्तरूल इस्लाम शाहीन तीसरी बार समस्तीपुर सीट पर निर्वाचित हुए। सरायरंजन की जमीं पर जीत की हैट्रिक बनाकर मंत्री बने विजय चौधरी सरायरंजन विधानसभा सीट से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी तीसरी बार चुनावी मैदान में विजयी रहे। हालांकि उनके जीत का अंतर काफी कम रहा। हैट्रिक मारने की खुशी में उन्हें इस बार फिर से मंत्री बनाया गया। सरायरंजन के मतदाताओं ने उनकी जीत पर फूले नहीं समाया। कल्याणपुर विधानसभा सीट से महेश्वर हजारी भी दूसरी बार जितने में कामयाब रहे। समर्थन और विरोध के बीच उन्होंने अपनी नैया को मझधार से निकाल ही लिया। वहीं वारिसनगर विधानसभा सीट से अशोक कुमार मुन्ना हैट्रिक मारने में कामयाब रहे।

लालू परिवार की समस्तीपुर में एंट्री

यूं तो समस्तीपुर जिला से चुनाव लड़ने वाले कई सुरमा स्वयं थे। लेकिन राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव ने जिले के हसनपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर अपने पिता का नाम भी इस जिले से जोड़ दिया। एकाएक उनकी इंट्री ने जदयू के युवा विधायक राजकुमार राय को हैट्रिक लगाने से रोक दिया। दस वर्षो बाद विभूतिपुर में फहराया लाल झंडा

कभी जिले का लेनिनग्राद कहे जाने वाले विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र में दस वर्षों बाद लाल झंडा लहराया। माकपा के तेजतर्रार युवा नेता अजय कुमार ने जदयू प्रत्याशी को रामबालक सिंह की हैट्रिक को चट्टान की तरह रोक दिया। हालांकि इसकी मुख्य वजह बने लोजपा प्रत्याशी चंद्रबली ठाकुर। लोजपा व कांग्रेस को सर्वाधिक नुकसान

संपन्न विधानसभा चुनाव में जिले में सर्वाधिक नुकसान लोजपा व कांग्रेस को हुआ। कांग्रेस ने 2015 में जीती सीट भी गंवा बैठी वहीं लोजपा का खाता भी नहीं खुल पाया। स्वयं समस्तीपुर के सांसद प्रिस राज के बड़े भाई कृष्ण राज को भी रोसड़ा सीट से हार का सामना करना पड़ा। और तो और नौ विधानसभा सीट से उम्मीदवारी देने के बाद उसका यहां खाता भी नहीं खुल पाया।

Share This Post