दुनिया

चीनी कंपनी हुवावेई के खिलाफ रिलायंस जियो बनेगा अमेरिका का हथियार

रिलायंस इंडस्ट्रीज चेयरमैन मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो की अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने जमकर तारीफ की है। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के स्वामित्व वाली रिलांयस जियो को ‘क्लीन टेल्को’ कहा है। बता दें आरआईएल के चेयरमैन मुकेश अंबानी का दावा है कि रिलायंस जियो दुनिया का एकमात्र नेटवर्क है जो एक भी चीनी उपकरण का उपयोग नहीं करता है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने दावा किया है कि दुनियाभर के दिग्गज दूरसंचार कंपनियां चीनी कंपनी हुवावेई के साथ अब कारोबार करने से इनकार कर रही हैं । पोम्पियो ने कहा कि अब माहौल चीन की प्रौद्योगिकी कंपनी के खिलाफ होता जा रहा है।

माइक पोम्पियो ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि दुनिया के प्रमुख टेलिकॉम ऑपरेटर्स, जिनमें स्पेन के टेलीफोनिका, साथ ही ऑरेंज, ओ 2, जियो, बेल कनाडा, टेलस, और रोजर्स और भी कंपनियां हैं, जो साफ-सुथरे व्यापार की ओर आगे बढ़ रहे हैं। दुनिया के लोग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बुनियादी ढांचे से अलग हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि ये कंपनियां निगरानी करने वाले देशों की कंपनियों मसलन हुवावेई के साथ अब कारोबार करने से इनकार कर रही हैं। सीसीपी सर्विलांस स्टेट के साथ व्यापार करने के लिए लोग पीछे हट रहे हैं। इसमें चीन की दिग्गज कंपनियां जिनमें Huawei भी शामिल हैं, जिनके साथ व्यापार करने से लोग मना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दुनियाभर के दूरसंचार ऑपरेटरों के साथ हुवावेई के करार समाप्त हो रहे हैं, क्योंकि ये देश अपने 5जी नेटवर्क के लिए भरोसेमंद वेंडर की सेवाएं ही लेना चाहते हैं। पोलैंड, स्वीडन, चेक गणराज्य, एस्टोनिया, रोमानिया, लातविया और डेनमार्क जैसे देशों ने यह अपनाया है। हाल ही में, ग्रीस ने अपने 5 जी बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए हुवावेई के बजाय एरिक्सन का उपयोग करने के लिए सहमति जताई गई है।

बता दें दुनिया की प्रमुख दूरसंचार आपूर्तिकर्ता और दूसरी सबसे बड़ी फोन निर्माता कंपनी हुआवेई को अमेरिकी अधिकारियों द्वारा चीनी सत्तारूढ़ वितरण के साथ कथित करीबी संबंधों के लिए भारी जांच की जा रही है। अमेरिका ने अपनी कंपनियों और उसके सहयोगियों को हुआवेई के साथ काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। जनवरी 2020 में, यूके के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने Huawei को देश के 5G बुनियादी ढांचे के केवल गैर-प्रमुख भागों के निर्माण की स्वीकृति दी।

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