समस्तीपुर

राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में समस्तीपुर आया नीचे

समस्तीपुर नगर परिषद इस बार राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन में दिखाने के बदले पिछले साल की रैंकिग से भी नीचे चला गया। पिछली रैंकिंग में पचास से एक लाख की जनसंख्या वाले ईस्ट जोन के शहरों की रैंकिग में यह चौथे स्थान पर था। लेकिन इस बार यह एक स्थान नीचे खिसक कर पांचवें स्थान पर आ गया है। शहर में गंदगी, जलजमाव, ड्रेनेज के खस्ता हालत, अतिक्रमण व नाला जाम आदि तमाम अनसुलझी समस्याएं इसकी वजह मानी जा रही है। ये समस्याएं दूर होने की बजाय बढ़ ही गयी हैं। हालांकि समस्याओं के निदान के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं। लेकिन उसका धरातल पर कोई पता नहीं चलता है। इससे अधिकांश प्लान व कार्य योजनाएं फाइलों तक सिमट कर रह जाती हैं।

ड्रेनेज व्यवस्था का खास्ता हाल

शहर के अंदर ड्रेनेज का हाल पूरी तरह खस्ता है। ड्रैनेज अव्यवस्थित हैं। प्राक्कलन के अनुसार नाला नहीं बनाया गया है। इसके कारण इसकी लेबलिंग अस्त व्यस्त है। जहां ऊंचा नाला बनना था वहां नीचा बना है जहां नीचा होना था वहां उंचा बना है।

कूड़ा उठाव का बुरा हाल

कूड़ा उठाव की व्यवस्था तो सबसे दोषपूर्ण रही है। एक तो नियमित उठाव नहीं होता है। होता भी है तो उसकी खानापूर्ति ही की जाती है। इससे मोहल्लों में खाली खेतों व खाली मैदान कूड़ा से पटा रहता है। इसका कभी उठाव नहीं होता है। इसके कारण शहर में गंदगी सब दिन रहती है।

जलजमाव की समस्या

शहर की सबसे बड़ी समस्या जलजमाव की है जिसके स्थायी निदान के लिए आज तक कोई ठोस उपाय नही किए गए हैं। बरसात में तो यह लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती है। गंभीर स्थिति आने पर नप हर बरसात में जेनरेटर लगा कर जलजमाव दूर करने का प्रयास करती है जिसमें हर साल तेल खपत में लाखों रुपये के वारे न्यारे होते हैं। नालों पर अतिक्रमण के कारण नालों की उड़ाही नही होती और यह जाम ही रह जाता है।

कचरा प्रबंधन की व्यवस्था

शहर में आज तक कूड़ा के निस्तार के लिए कचड़ा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं हुई है। इसके लिए नगर परिषद ने योजना भी बनायी लेकिन यह फाइलों तक ही सिमट कर रह गयी। जब कि अब शहर का कूड़ा फेंकने के लिए नप को कहीं स्थायी जमीन भी नही मिल रहा है। रोज करीब 40 टन कूड़ा निकलता है।

बोले जिम्मेवार

शहर के विकास का कोई काम ही सही से नहीं हुआ है। न ड्रेनेज की व्यवस्था सुधरी, न कूड़ा उठाव की और न जल जमाव आदि की समस्या का ही सही से निदान हुआ। इन समस्याओं पर हम आवाज भी उठाते रहे हैं ।

-शारिक रहमान लवली, उपाध्यक्ष, समस्तीपुर नगर परिषद।

समस्तीपुर नगर परिषद में मेरे कार्यकाल में यह 2019 के स्वच्छता सर्वेक्षण में पचास से एक लाख की जनसंख्या वाले शहर के केटेगरी में समस्तीपुर नप ईस्ट जोन में चौथे रैंक पर था। लेकिन इस बार चौथे से पांचवें रैंक पर आ गया है। प्लान बनाकर उस पर सक्रियता से काम करने की जरूरत है।

-देवेंद्र सुमन, पूर्व ईओ, समस्तीपुर नप

इस बार के स्वच्छता सर्वेक्षण में समस्तीपुर नगर निकाय ईस्ट जोन में 33 वें रैंक पर है जो पिछले साल से बेहतर स्थिति में हैं। आगे हम और बेहतर स्थिति में रहेंगे। चूंकि, हमारे पास सीमित संसाधन हैं और उसी में हमें बेहतर करने की चुनौती है। शहर में ड्रेनेज, कूड़ा उठाव, कचरा प्रबंधन समेत सभी व्यवस्था को दुरुस्त करने में लगे हैं। इसका असर निकट भविष्य में दिखेगा।

– रजनीश कुमार, ईओ, समस्तीपुर नगर परिषद।

Share This Post