समस्तीपुर

कई परिवर्तनों से गुजरते हुए समस्तीपुर रेलमंडल के 51 वर्ष पूरे

समस्तीपुर। छोटी लाइन से बड़ी लाइन, डीजल इंजन से इलेक्ट्रिकल इंजन, सिगल लाइन से डबल लाइन का सफर तय करते-करते समस्तीपुर मंडल ने स्थापना के 51 वर्ष पूरे कर लिए। पूर्वोत्तर रेलवे के एक मंडल के रूप में 05 सितम्बर 1969 को यह मंडल अस्तित्व में आया। इस दौरान यात्री सुविधा का विस्तार उत्तर बिहार के चंपारण, मिथिलांचल एवं कोसी प्रक्षेत्र के पूरे भाग में हुआ। इस दौरान मंडल ने कई मुख्यालयों को भी परिवर्तित होते देखा। इसमें तिरहुत स्टेट रेलवे, (टीएसआर), बंगाल एण्ड नार्थ वेस्टर्न रेलवे (बीएनडब्लूआर), अवध तिरहुत रेलवे (ओटीआर), पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) का अंग था। पूर्व मध्य रेलवे के 1 अक्टूबर 2002 में अस्तित्व में आने के बाद समस्तीपुर इसका अंग बना। जो लगातार सूबे के 15 जिलों में अपनी सेवाएं देता रहा। यह मंडल पूर्व मे छोटी लाइन के माध्यम से यात्रियो को अपनी सेवाएं दे रहा था जो अब बड़ी लाइन मे परिवर्तित हो चुका है। मंडल के लगभग 75 फीसद रेल खंडो का विद्युतीकरण हो चुका है तथा बचे हुए खंडो में कार्य प्रगति पर है। यह मंडल लगभग 1156 ट्रैक किलोमीटर पर अपने यात्रियों को कुल 115 स्टेशन, 69 हाल्ट स्टेशन तथा 17 फ्लैग स्टेशनों के माध्यम से अपनी सेवाएं प्रदान करता है।

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