बिहार समस्तीपुर

समस्तीपुर : आर्थिक संकटो का सामना कर रहे हैं मक्का उत्पादक किसान

प्राकृतिक आपदा हो या कोई और इन सब की मार किसानों को ही झेलनी पड़ती है। कड़ी मेहनत के बाद भी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने से हर बार किसान ही तबाह होते हैं। मक्का उत्पादक किसान अब आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। फसल का लागत मूल्य स्थानीय स्तर पर नहीं मिलने के कारण किसानों की बेचैनी बढ़ गई है। लॉकडाउन में उपजी संकट से दूसरे जगहों से भी व्यापारी नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे इस समस्या का निदान हो सके। लागत मूल्य पर भी घाटा सहकर किसानों ने इसकी बिक्री शुरू कर दी है। फसल को जमा कर रखने की समस्या से किसानों के सामने खड़ी है।

समय पर फसल की बिक्री नहीं होने से किसान अगली फसल के लिए खुद को तैयार नहीं कर पा रहे हैं। जिले में पॉल्ट्री फीड इंडस्ट्री में काम बंद होने से किसान औने-पौने दाम में मक्का बेचने को मजबूर है। विभागीय आंकड़ा के अनुसार जिले में 36 हजार हेक्टेयर में मक्का की खेती इस बार की गई थी। लॉकडाउन के बाद भी मक्का की फसल से उत्पादन गेहूं व तेलहन की अपेक्षा में ज्यादा हुआ है, अब दाम नहीं मिलने से सारे जरूरी काम बंद हैं। फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान परेशान है। किसानों की चिंता है कि अगली फसल के साथ-साथ घर का जरूरी खर्च की पूर्ति कहां से कर पायेंगे।

1760 रुपये निर्धारित है सरकारी मूल्य

सरकारी स्तर पर मक्का की खरीद नहीं होने से किसानों में नाराजगी व्याप्त है। किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से मक्का की कीमत 1760 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है। लेकिन राज्य स्तर पर मक्का की खरीद करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। सरकारी स्तर पर व्यवस्था नहीं होने से किसान औने-पौने दाम में अपनी फसल बेचने को मजबूर हो जाते हैं। वहीं बिचौलियों की ओर से इसका पूरा फायदा उठाया जाता है।

पिछली बार मिला था बेहतर मूल्य

मक्का की खेती में किसानों को पिछली बार मुनाफा हुआ था। मरिचा पंचायत के किसान बिल्टु सहनी कहते है कि पिछले साल 2000 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा की दर से मक्का की बिक्री हो गई थी। इस बार बेहतर पैदावार होने के बावजूद लागत पूंजी निकालना मुश्किल है। लॉकडाउन में उपजी संकट के कारण जैसे तैसे बेचकर रुपया का जुगाड़ करना पड़ रहा है। समय से पैसा नहीं होने पर धान की खेती प्रभावित हो जाएगी।

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