Money
बिज़नेस

वैक्सीन की कमी से लंबा खिंचेगा आर्थिक सुस्ती का दौर

देश में वैक्सीनेशन की सुस्त रफ्तार और राज्यों में लगाए गए लॉकडाउन, कोरोना प्रतिबंधों से आर्थिक सुस्ती का दौर लंबा खिंच सकता है। केयर रेटिंग की तरफ से कराए गए सर्वे में 84 फीसदी कारोबारियों ने माना है कि नई लहर से कारोबारी अनिश्चितता बढ़ी है। सर्वे में 54 फीसदी लोग ये भी मानते हैं कि अगले 6 महीने में और हालात बुरे हो सकते हैं।

सरकार की वैक्सीनेशन मुहिम को लेकर 54 फीसदी लोग आशान्वित हैं लेकिन 46 फीसदी लोगों का विश्वास डगमगा रहा है। इन्हें देश में वैक्सीन की कमी और उसके सप्लाई के सीमिति संसाधनों की वजह से तेजी से वैक्सीनेशन होने में शंका है। महामारी के इस नए दौर में गैर जरूरी उत्पादन से जुड़ा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित‌ हो रहा है जिससे कारोबारियों को एनपीए बढ़ने की आशंका सताने लगी है। सर्वे में ज्यादातर लोगों ने माना है कि होटल और ट्रैवल इंडस्ट्री सबसे ज्यादा प्रभावित रहेंगे। 87 फीसदी ने माना कि होटल और रेस्टोरेंट कारोबार, वहीं 83 फीसदी के मुताबिक ट्रैवल क्षेत्र में कामकाज प्रभावित रहेगा। इसके अलावा करीब 60 फीसदी कारोबारी मानते हैं कि देश में बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाला टेक्सटाइल क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित रहेगा। साथ ही ऑटो और कैपिटल गुड्स उद्योग का भी हाल हुरा रहेगा।

50 फीसदी कारोबारी मानते हैं कि कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट में भी कामकाज प्रभावित रहेगा। हालांकि वर्कफ्रॉम होम की व्यवस्था होने से आईटी और संचार क्षेत्र का काम ज्यादा प्रभावित नहीं होगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि 80 फीसदी कारोबारी मानते हैं कि लॉकडाउन और पाबंदियों की वजह से एनपीए यानि खराब कर्ज की हालत और बुरी हो सकती है। समस्या के समाधान के तौर पर रिजर्व बैंक की तरफ से कर्ज पर मोरटोरियम व्यवस्था लाने और इमर्जेंसी क्रेटिज लाइन गारंटी स्कीम को भी बढ़ाने की मांग की जा रही है।

Share This Post