बिहार

लॉकडाउन की वजह से घर में रखा आलू-प्याज जब सड़ने लगा तब श्रीकांत ने बांस से ही बना दिया कोल्ड स्टोरेज

आवश्यकता आविष्कार की जननी है। लॉकडाउन फेज में इसे साबित कर दिखाया बगहा के किसान श्रीकांत हलदर ने। कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से घर में रखा आलू-प्याज जब सड़ने लगा तब श्रीकांत ने बांस से ही कोल्ड स्टोरेज बना दिया। स्थानीय तकनीक से बने इस देसी कोल्ड स्टोरेज में आलू हमेशा ताजा दिखता है। बगहा के चौतरवा इलाके में बंगाली कॉलोनी निवासी श्रीकांत हलदर ने बताया कि लॉकडाउन के समय बाजार में आलू-प्याज ले जाने की छूट नहीं थी। नतीजतन घर में रखा उनका आलू सड़ने लगा। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें?

इस बीच उनको झारखंड में सीखे अनुभव याद आए। श्रीकांत के अनुसार,  कुछ महीने पहले वे हजारीबाग गए थे। वहां एक किसान पाठशाला में हिस्सा लेने का मौका मिला। किसान पाठशाला में मिली जानकारी को ही श्रीकांत ने आजमाया तथा बांस का कोल्ड स्टोरेज बनाना शुरू कर दिया। शुरुआत में आसपास के लोगों के लिए यह कौतुहल का विषय था। लेकिन परिणाम सुखद निकला तब सभी सराहना करने लगे। सरपंच रीना देवी ने कहा कि श्रीकांत द्वारा बनवाया गया यह कोल्ड स्टोरेज छोटे व मंझोले किसानों के लिए वरदान है। महज चार हजार की लागत से बनने वाले इस कोल्ड स्टोरेज की क्षमता नौ क्विंटल तक है। पंचायत समिति सदस्य संजय पाल ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज बनाने की इस देसी तकनीक को अन्य किसानों के बीच भी साझा किया जाएगा। बाकी लोग भी इससे लाभान्वित होंगे।

तीन रैक में रखा जाता है नौ क्विंटल:

श्रीकांत हलदर ने बताया कि बांस से तीन मंजिला कोल्ड स्टोरेज में पर्याप्त आलू-प्याज रखा जा सकता है। प्रत्येक मंजिल में तीन-तीन क्विंटल आलू या प्याज रखा जा सकता है। प्रत्येक रैक की लंबाई-चौड़ाई छह फीट तथा ऊंचाई तीन फीट होती है। एक कोल्ड स्टोरेज को बनाने की लागत करीब 4000 रुपए आती है। इसमें 10 बांस का प्रयोग कर बनाया गया है। इसको घर में हवादार जगह पर ही बनाना है ताकि क्रॉस वेंटिलेशन होता रहे और आलू-प्याज खराब नहीं हो। श्रीकांत हलदर की मानें तो एक बार बना लेने पर इसका प्रयोग अगले दस साल तक किया जा सकता है।

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