Career बिहार

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के ऑफ़्लाइन परीक्षाएँ लेने के फ़ैसले से विद्यार्थियों एवं अभिभावकों में मँडराने लगा जान का ख़तरा

मोतिहारी। एक तरफ़ जहाँ कोरोना का आँकड़ा रोज़ाना 90,000 पॉज़िटिव मरीज़ों के पार जाने लगा है वही दूसरी ओर महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय बिहार (MGCUB) एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय अबतक नज़र आया है जिसमें अंतिम वर्ष की परीक्षाएँ ऑफ़्लाइन होने वाली हैं। इसको लेकर विद्यार्थियों एवं अभिभावकों में भी काफ़ी डर का माहौल बन गया है।

आपको बताते चलें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(UGC) ने अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के लिए जुलाई में अपना गाइडलाइन ज़ारी कर दिया था। उसके अनुसार विश्वविद्यालय स्वतंत्र थे कि वो अपनी परीक्षाएँ ऑनलाइन/ऑफ़्लाइन माध्यम से 30 सितंबर से पहले करवा लें।

इसी उपलक्ष्य में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय ने 14 सितंबर से लेकर 30 सितंबर तक पी.एच.डी., एम.फ़ील. और स्नातक अंतिम वर्ष के परीक्षाएँ ऑफ़्लाइन माध्यम से करवाने का नोटिस जारी कर दिया है। इसके बाद से विद्यार्थियों और उनके माता-पिता के मन में काफ़ी डर का माहौल बना हुआ है।

विवि के अंतिम वर्ष के छात्रों से हमारे समाचार 9 की टीम ने बात करने की कोशिश की तो उनका कहना है कि विवि प्रशासन उन विद्यार्थियों की बातों को नज़रअन्दाज़ कर रहा है। उन्होंने कई बार ईमेल के माध्यम से, ट्विटर के माध्यम से, अपनी बात विवि प्रशासन तक पहुँचाने की कोशिश की, किंतु विवि प्रशासन के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी। विद्यार्थियों का कहना है कि वे कभी भी परीक्षा करवाने के ख़िलाफ़ नहीं है, पर यह जो ऑफ़्लाइन परीक्षाएँ कराने का फ़ैसला लिया गया है, यह हज़ारों जानों से खिलवाड़ करने जैसा है। विवि प्रशासन चाहे तो ऑनलाइन माध्यम से परीक्षाएँ करवाई जा सकती थी। कुछ विद्यार्थियों का कहना यह भी है कि विवि प्रशासन ख़ुद भी बहुत अच्छे तरीक़े से जानता है की ऑनलाइन जो पढ़ाई हुई है विभागों की ओर से, वह कितनी कारगर हुई है और इस स्थिति में अगर परीक्षाएँ ऑफ़्लाइन करवाने की बात हो रही है तो यह बच्चों के रिज़ल्ट और भविष्य से भी खिलवाड़ है।

यहाँ देखने योग्य बात यह है कि यह विश्वविद्यालय बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले में स्थित है, जो कि खुद कोरोना के मामले में अबतक बिहार में काफ़ी संवेदनशील इलाक़ों में से एक है। और अभी कुछ हफ़्तों पहले तक ज़िले में बाढ़ का भी प्रकोप था तो बाढ़ ग्रस्त इलाक़ों से आने वाले लोगों में नाना प्रकार की अलग बीमारियों की भी आशंका रहती है।

हमारे समाचार 9 की टीम ने कुछ अभिभावकों से भी बात करने की कोशिश की। अभिभावकों में भी यही डर का माहौल है कि वह अपने बच्चों को किस तरह ऐसे विश्वविद्यालय जाने की इजाज़त दे दें। विश्वविद्यालय अगर ऑनलाइन परीक्षाएँ आयोजित करवा सकता तो काफ़ी सुविधाजनक होता। अभी विश्वविद्यालय में देशभर के अलग अलग इलाक़ों से छात्रों एवं कर्मियों का भी आना होगा, इस स्थिति में कोरोना फैलने का बहुत डर रहेगा और जान गँवाने का ख़तरा लगा रहेगा।

साथ ही कुछ अभिभावकों का यह भी कहना है कि लॉक्डाउन होने पर पैसों की तंगी के कारण उन्होंने अपने बच्चों का किराए का मकान ख़ाली करवा दिया था, और अब इस स्थिति में वह अपने बच्चों को परीक्षाएँ देने के लिए कहाँ छोड़ दें। इस आर्थिक तंगी के कारण जैसे-तैसे उनका घर चल रहा और इस स्थिति में वह होटल में रहने का खर्च भी नहीं सह सकते।

आपको बताते चलें कि विश्वविद्यालय में छात्रावास की भी सुविधा नहीं है तो इससे बाहर से आने वालों छात्रों को काफ़ी असुविधा होगी। ऐसे स्थिति में कुछ भी निर्णय लेने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को इन सब बातों का भी संज्ञान लेना चाहिए था। छात्रों को होने वाली दिक़्क़तों एवं उनके स्वास्थ पर मंडरा रहे संकट के कारण चारों तरफ़ ख़ौफ़ का माहौल हो गया है।

सूत्रों से मालूम चला है कि कुछ अभिभावक एवं छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से इस स्थिति में उनका कोविड-19 बीमा करवाने की भी माँग कर रहे हैं और वह विवि प्रशासन से यह भी माँग कर रहे हैं कि किन्ही छात्र/छात्राओं को अगर कुछ होता है तो उसकी सारी ज़िम्मेदारी विवि प्रशासन की होगी क्यूँकि विश्वविद्यालय प्रशासन सबकी जान से खिलवाड़ करने पर आ गया है। विवि में ऑफ़्लाइन परीक्षाएँ होना कहीं से भी छात्रों के हित में नहीं है।

हमारी टीम ने भी इस मामले में विवि प्रशासन के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, पर बात नहीं हो पाई।

Share This Post