बिहार विधानसभा चुनाव 2020

उत्तर बिहार के जिलों में सुरक्षा के लिए हुए आकलन पर भी चुनाव आयोग ने जताई नाराजगी

समीक्षा में उप निर्वाचन आयुक्त ने उत्तर बिहार के जिलों में शराब बरामदगी पर चिंता जताई है। बैठक के दौरान अधिकारियों से कहा कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद शराब कैसे मिल रही है। खासकर उन जिलों में जिसकी सीमा दूसरे देश या राज्य से सटी नहीं है। यह बेहद चिंताजनक है।
शराब बरामदगी और उसके सापेक्ष अपराधियों की कम गिरफ्तारी पर भी उन्होंने चिंता जतायी है। जिलों के पुलिस अधिकारियों से पूछा कि जब शराब की बरामदगी इतनी मात्रा में हो रही है तो फिर इस धंधे में शामिल धंधेबाजों की गिरफ्तारी व उनपर कार्रवाई उस अनुपात में कैसे नहीं हो रही है। उप निर्वाचन आयुक्त ने ऐसे तत्वों की शिनाख्त करने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। चेतावनी भी दी है कि अगली बैठक में इस मामले की पुन: समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता पड़ी तो वरीय अधिकारियों से इस मसले पर बात की जाएगी।
समीक्षा बैठक में जिलों में सुरक्षा के लिए हुए आकलन पर भी चुनाव आयोग ने नाखुशी जाहिर की है। अधिकांश जिलों ने सुरक्षा बल की मांग तो कर दी है, लेकिन बैठक में उसका औचित्य ही नहीं बता सके। आयोग ने कहा कि चुनाव से पूर्व अगली बैठक में इस संबंध में एहतियात बरती जाए और ठोस आकलन के बाद ही अपनी रिपोर्ट समीक्षा में सामने रखी जाए।
कई जिलों में आर्म्स सत्यापन का काम अटका
तिरहुत, कोसी व दरभंगा प्रमंडल के तमाम जिलों में हथियार लाइसेंस का सत्यापन अटका है। समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इसको लेकर कड़ी चेतावनी दी गई। तीनों प्रमंडल के कई जिलों में तो लाइसेंस सत्यापन का काम भी शुरू नहीं हुआ है। उप निर्वाचन आयुक्त ने हैरानी जताते हुए कहा कि अब कब सत्यापन होगा। इस तरह की स्थिति तीनों प्रमंडल में वारंट के तामिला व कुर्की जब्ती के मामलों का भी रहा। आयोग ने कहा कि वारंट व कुर्की के कई मामले वर्षों से लंबित हैं। इनका तुरंत निपटारा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अगली बैठक में इसकी कड़ी समीक्षा की जाएगी और यदि इसमें किसी तरह की लापरवाही बरती गई तो अधिकारियों के लिए अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वारंट का तामिला न होने व कुर्की के मामले लंबित रहने का सीधा असर विधि व्यवस्था पर पड़ता है। अधिकारियों को इसमें सख्ती दिखानी होगी और उसका परिणाम धरातल पर नजर आना चाहिए।
बूथों पर इंट्रेंस व एक्जिट की अलग व्यवस्था करें
आयोग ने वैशाली डीएम के पीपीटी प्रतिवेदन पर गहरी नाराजगी जाहिर की। वहां बताया गया कि चुनाव के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा जाएगा, ऐसा प्लान तैयार किया है। इसपर आयोग ने पूछा कि एक मतदान केंद्र को एक हजार मतदाता तक सीमित करने के बाद उसमें तीन सहायक बूथ बनाए गए। आखिर अब एक ही भवन में चार बूथ हो गए तो मतदाताओं के प्रवेश व निकास के लिए अलग-अलग द्वार बनाए गए हैं या नहीं। इसपर निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि आने-जाने का एक ही द्वार है। आयोग ने इसपर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह तो निर्देशों का उल्लंघन है। मतदाताओं की अधिक संख्या एक ही दरवाजे से आएगी और जाएगी तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कैसे होगा। आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों से कहा कि वे सभी बूथों के प्रवेश व निकास द्वार की अलग व्यवस्था सुनिश्चित करें। 

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