वैशाली

हाजीपुर विधानसभा सीट: समाजवादियों के गढ़ रहे इस सीट पर 20 साल से है भाजपा का कब्जा

दलों के नाम भले ही अलग-अलग हों पर राजधानी पटना के करीबी और उत्तर बिहार का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र (Hajipur assembly seat) को आजादी के बाद प्रथम चुनाव से लेकर 50 वर्षों तक के चुनाव में समाजवादी विचारधारा से जुड़ा उम्मीदवार ही रास आया। किन्तु, बाद में क्षेत्र का मिजाज बदला तो पिछले 20 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी की लगातार जीत हो रही है। वर्ष 2000 में नित्यानंद राय ने समाजवादियों के गढ़ में सेंध लगाई थी।

आजादी के बाद शुरुआती तीन चुनावों में कांग्रेस के अंदर प्रखर समाजवादी दृष्टि वाले उम्मीदवार ही यहां से जीतते रहे। 1952 में कांग्रेस के सरयू प्रसाद तो 1957 और1962 में दीप नारायण सिंह को जीत मिली, जिन्हें लोग प्यार से दीप बाबू कहते थे। दीप बाबू को कांग्रेस खेमे में समाजवादी विचारधारा का नेता माना जाता था। वे कुछ समय के लिए बिहार के मुख्यमंत्री भी बने। इन चुनाव परिणामों के कारण ही हाजीपुर को समाजवादियों का गढ़ माने जाने लगा था। 1967 के चुनाव में सीपीआई के किशोरी प्रसन्न सिंह इस सीट पर काबिज हुए और उसके बाद के कई चुनावों तक समाजवादी घराने से जुड़े उम्मीदवारों ने अपना दबदबा बनाए रखा। null

1969 के मध्यवर्ती और 1972 के आम चुनाव में प्रखर समाजवादी मोतीलाल सिंहा कानन ने क्रमश: समाजवादी और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव अपने नाम किया। आपातकाल के बाद 1977 में जो जनता लहर चली, उसकी कमान भी समाजवादियों के हाथ रही। उस चुनाव में समाजवाद के  प्रवक्ता प्रो. जगन्नाथ प्रसाद यादव को जनता ने लगभग 19 हजार मतों से विजयी बनाकर अपना प्रतिनिधि चुना। 1980 में कांग्रेस के जगन्नाथ प्रसाद राय, 1985 में लोकदल से मोतीलाल सिन्हा कानन, 1990 में फिर कांग्रेस से जगन्नाथ प्रसाद राय और 1995 में जनतादल से राजेन्द्र राय ने बाजी मारी।

नित्यानंद राय ने लगाई थी यहां सेंध
वर्ष 2000 के चुनाव से क्षेत्र की राजनीति ने करवट बदली और तबसे भाजपा इस पर काबिज है। इस चुनाव में भाजपा के नित्यानंद राय (अभी केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री) ने राजद के राजेन्द्र राय को हराकर जो कब्जा जमाया, वह 2005 के फरवरी और अक्टूबर के दोनों चुनावों के साथ-साथ 2010 के चुनाव में भी बरकरार रहा। वे वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उजियारपुर से भाजपा के सांसद चुने गए और उसके बाद उसी साल हुए उपचुनाव में उनके निकटतम अवधेश सिंह उम्मीदवार बने और जीते।  2015 के चुनाव में भी मतदाताओं ने श्री सिंह को ही अपना विधायक चुना। पिछले बीस वर्षों से यह सीट भाजपा की बनी हुई है। इस बार भी यहां से भाजपा ही लड़ेगी।

कुल मतदाता-  3 लाख 30 हजार 892
महिला-1,52, 924
पुरुष – 1,77, 940

हाजीपुर सीट पर कब किसने दर्ज की जीत
1952    सरयुग प्रसाद    कांग्रेस
1957   दीप नारायण सिन्हा   कांग्रेस
1962   दीप नारायण सिन्हा   कांग्रेस
1967   किशोरी प्रसन्न सिंह  भाकपा
1969   मोती लाल कानन     सोसलिस्ट पार्टी  
1972   मोतीलाल कानन       संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1977   जगन्नाथ प्रसाद यादव  जनता पार्टी
1980   जगन्नाथ प्रसाद राय     कांग्रेस
1985   मोतीलाल कानन       लोकदल
1990   जगन्नाथ प्रसाद राय    कांग्रेस
1995   राजेंद्र राय               जनता दल
2000    नित्यानंद राय          भाजपा
2005 (फरवरी) नित्यानंद राय  भाजपा
2005 (अक्टूबर) नित्यानंद राय  भाजपा
2010 नित्यानंद राय    भाजपा
2014 (उपचुनाव) अवधेश सिंह  भाजपा
2015  अवधेश सिंह    भाजपा

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